गोरखपुर, जेएनएन : डाक विभाग की रफ्तार इस अत्याधुनिक युग में पहले से ही गड़बड़ है, लेकिन एक साल में डाकिया व अधिकारियों की बदौलत लोगों में डाक विभाग को अपनी एक अलग पहचान मिली है। राष्ट्रीय आधार आधारित सेवा (एईपीएस) योजना के तहत देवरिया जिले में डाकिया लोगों के दरवाजे पर पहुंच कर पैसा देने का काम किए। इसका असर यह रहा कि इस योजना की मांग भी ग्राहकों में बढ़ गई है। अब यह योजना लोगों को भा रही है।

कोरोना काल में लोगों के दिलों में उतरे डाकिया

इस सेवा की बदौलत कोरोना काल में डाकिया लोगों के दिल में उतर गए। अप्रैल,2020 से लेकर मार्च, 2021 तक इस योजना के तहत 1 लाख 40 हजार लोग लाभान्वित हुए और लगभग 40 करोड़ का इस सेवा के जरिये भुगतान किया गया। डाकिया को एक व्यक्ति को केवल दस हजार रुपये तक एक दिन में भुगतान करने का निर्देश है। एक ग्राहक दिन भर में केवल इस सेवा से दस हजार रुपये ले सकता है। कोरोना काल में लोग डाकिया को फोन कर घर बुलाकर अंगुठा लगाकर रुपये निकाल लेते हैं।

क्या है एईपीएस

राष्ट्रीय आधार आधारित सेवा का मतलब यह है कि डाकिया को बायोमीट्रिक सिस्टम दिया गया है, वह बायोमीट्रिक सिस्टम हर बैंक से जुड़ा हुआ है और आधार नंबर मशीन में डालने के बाद डाकिया अंगूठा लगाता है। अगर अंगूठा मैच किया तो तत्काल डाकिया रुपये उपलब्ध करा देता है। इस सेवा में यह शर्त नहीं है कि वह केवल डाक विभाग का ही ग्राहक रहे तो ही उसे रुपये दिए जाएंगे।

इसलिए इस सेवा की और बढ़ गई है मांग

आज ग्राहक सेवा केंद्रों पर लोगों को अंगूठा लगाकर रुपये निकालने की सुविधा दी गई है। जनपद में कई ग्राहक सेवा केंद्रों पर रुपये निकालने के दौरान लोगों के साथ जालसाजी हो गई है। इसके चलते अब लोग ग्राहक सेवा केंद्रों पर विश्वास करने की बजाय डाक विभाग के इस सुविधा पर विश्वास ज्यादा कर रहे हैं और दस हजार तक रुपये निकालने के लिए डाकिया की मदद ले रहे हैं।

जालसाजी से परेशान लोग कर रहे इस योजना पर विश्‍वास

देवरिया के डाक अधीक्षक फूलचंद्र यादव ने कहा कि एईपीएस योजना का लाभ एक लाख 40 हजार लोगों ने लिया है। जालसाजी से परेशान लोग इस योजना पर विश्वास कर रहे हैं।

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