गोरखपुर, गजाधर द्विवेदी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर गोरखपुर में विदेशी मेहमान आएंगे। अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कान) के विदेशी संन्यासी भारतीय परिधान में एक सप्ताह तक पूरे शहर में जगह-जगह 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे' का गान करेंगे, झूमेंगे और यहां के लोगों को अपनी संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

17 को आएंगे अफ्रीका महाद्वीप के प्रथम संन्यासी दामोदर स्वामी

जन्माष्टमी 19 अगस्त को मनाई जाएगी। इसका आयोजन सायं चार बजे से क्लार्क ग्रैंड होटल, पार्क रोड में किया जाएगा। विदेशी मेहमान 17 अगस्त को शहर में आ जाएंगे और 23 अगस्त तक इस्कान के तारामंडल केंद्र में निवास करेंगे। इन मेहमानों में नाइजीरिया (पश्चिमी अफ्रीका) से दामोदर स्वामी महाराज भी शामिल हैं। वह अफ्रीका महाद्वीप के प्रथम सन्यासी एवं इस्कान के गुरु हैं। इसके अलावा रूस, फ्रांस, घाना, नाइजीरिया, जर्मनी, अर्जेंटीना, भूटान एवं बांग्लादेश से इस्कान भक्तों का आगमन हो रहा है।

गोरखपुर दो बार आ चुके हैं प्रभुपाद

इस्कान के संस्थापक भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद दो बार गोरखपुर आ चुके हैं। पहली बार वे अमेरिका जाने से पहले भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार से मिलने आए थे। 1966 में उन्होंने अमेरिका में इस्कान की स्थापना की थी। इसके बाद 1971 में पुन: अपने विदेशी शिष्यों के साथ भाईजी से मिलने गोरखपुर आए थे। यहां 21 दिनों तक निवास किए थे।

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रचार करता है इस्कान

विश्व के 190 देशों में इस्कान के 800 से अधिक मंदिर, गुरुकुल और गोशालाएं हैं। इस्कान भगवान कृष्ण और श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं का पूरे विश्व में प्रचार-प्रसार करता है।

शहर में बनेगा मंदिर

शहर में इस्कान का मंदिर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। महेसरा ताल के पास पांच एकड़ जमीन मिल चुकी है। शीघ्र ही संस्था के नाम से जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी। इसके बाद मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। इस्कान का केंद्र तारामंडल में बनाया गया है। प्रत्येक रविवार को भगवद्गीता की कक्षा आयोजित होती है। प्रत्येक शुक्रवार को सात सौ से अधिक लोगों को अन्न प्रसाद का वितरण किया जाता है। प्रतिदिन हरि संकीर्तन होता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हमारा सबसे बड़ा त्योहार है। भगवान श्रीकृष्ण ही हमारे आराध्य हैं। इस बार बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। विदेशी भक्त भी आएंगे और पूरे शहर में एक सप्ताह तक घूम-घूमकर संकीर्तन करेंगे। - विद्यापति माधवदास, संयोजक, इस्कान।

Edited By: Pradeep Srivastava