गोरखपुर, जेएनएन। बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कालेज में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। मरीज को ट्रामा सेंटर से नियम का हवाला देकर लौटा दिया गया। न कोरोना जांच की गई और न ही भर्ती कर इलाज शुरू हुआ। दूसरे दिन बुलाने पर स्वजन मरीज को लेकर पहुंचे, तो डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस संबंध में स्वजन की शिकायत पर मंडलायुक्त ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर  जांच बैठा दी है। मेडिकल कालेज प्रशासन से जवाब मांगा है।

सदर तहसील के शेरपुर चमराह (सिंहोरवा) निवासी राजेंद्र प्रसाद जायसवाल की पत्नी 60 वर्षीय शकुंतला देवी को चार सितंबर को कमजोरी महसूस हुई। स्वजन उन्हें निजी चिकित्सक के पास ले गए। उन्होंने मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। उसी दिन शाम को 6.45 बजे वे मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर पहुंचे। नियम का हवाला देकर कर्मचारियों ने उन्हें वापस भेज दिया। राजेंद्र के मुताबिक बताया गया कि कल आपको फोन से जिस समय बुलाया जाएगा, उसी समय आना होगा। वापसी में स्वजन ने बेतियाहाता की निजी पैथोलाजी में कोरोना जांच के लिए मरीज का नमूना दिया। दूसरे दिन मेडिकल कालेज जाते समय शकुंतला रास्ते में बेहोश हो गईं। मेडिकल कालेज पहुंचने पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। तब तक कोरोना जांच रिपोर्ट आ चुकी थी। वह पाजिटिव थीं, इसलिए कालेज प्रशासन ने शव रोक लिया। दूसरे दिन कोविड प्रोटोकाल के तहत राजघाट पर उनका अंतिम संस्कार कराया गया।

क्या है नियम

मेडिकल कालेज प्रशासन ने कोरोना से बचाव के लिए नई रूपरेखा में ओपीडी शुरू की है। इसमें मोबाइल पर पंजीकरण के अगले दिन मरीज को बुलाया जाता है। गंभीर रूप से बीमार शकुंतला को भी इसी नियम का हवाला देकर दूसरे दिन बुलाया गया था।

डाक्टरों की लापरवाही से जा चुकी है एक और मरीज की जान

बिछिया निवासी उपेंद्र मिश्र की पिछले 18 अगस्त की सुबह अचानक तबीयत खराब हो गई थी। स्वजन उन्हें लेकर मेडिकल कालेज पहुंचे। डाक्टरों ने कोरोना की आशंका जताते हुए भर्ती से मना कर दिया। स्वजन उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए। वहां भी कोरोना की बात कहते हुए डाक्टरों ने लौटा दिया। तारामंडल स्थित दूसरे निजी अस्पताल तक पहुंचने से पहले उनकी जान चली गई। इस संबंध में बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. गणेश कुमार का कहना है कि संदिग्ध मरीजों को भी भर्ती कर कोविड प्रोटोकाल के तहत उनका इलाज किया जा रहा है। उसके बाद कोरोना जांच कराई जा रही है। निगेटिव आने पर उन्हें संबंधित वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। इस तरह की शिकायत संज्ञान में नहीं है। पता करता हूं कि उस दिन ट्रामा में किसकी ड्यूटी थी।

 

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