अब कचरे का कचूमर निकालेगा 'स्मार्ट बिन', चकाचक दिखेगा गोरखपुर रेलवे स्टेशन
रेलवे बोर्ड ने बड़े स्टेशनों पर पारंपरिक कूड़ेदानों की जगह 'वेस्ट कांपेक्टर स्मार्ट बिन' लगाने की अनुमति दी है। यह ...और पढ़ें

कम होगी कूड़ेदान जल्दी भरने और कचरा बाहर फैलने की समस्या। जागरण
HighLights
रेलवे बोर्ड ने स्मार्ट बिन लगाने की प्रायोगिक अनुमति दी।
ये बिन कचरे को दबाकर उसकी मात्रा कम करेंगे।
स्टेशनों पर स्वच्छता और कचरा प्रबंधन बेहतर होगा।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। बड़े रेलवे स्टेशनों पर पारंपरिक कूड़ेदान (डस्टबिन) की जगह वेस्ट कांपेक्टर स्मार्ट बिन लगाया जाएगा। यह आधुनिक पात्र कचरे को स्वत: दबाकर उसकी मात्रा कम करेगा। यानी जितना कचरा, उतनी जगह की जरूरत नहीं होगी। इससे कूड़ेदान जल्दी भरने और कचरा बाहर फैलने की समस्या कम होगी। रेलवे बोर्ड ने 16 सितंबर को सभी जोनल रेलवे को पत्र भेजकर स्थानीय परिस्थितियों और परिचालन जरूरतों के अनुसार स्मार्ट बिन की उपयोगिता का आकलन करने तथा प्रायोगिक आधार पर इन्हें लगाने की अनुमति दी है।
खासकर अधिक भीड़ वाले स्टेशनों पर यह तकनीक उपयोगी होगी, जहां पारंपरिक डस्टबिन सीमित क्षमता के कारण जल्दी भर जाते हैं। कचरे को मौके पर ही दबाकर उसकी मात्रा घटाने से उसे उठाने और निस्तारण की जरूरत भी अधिक व्यवस्थित होगी। सफाईकर्मियों को बार-बार डस्टबिन खाली करने की जरूरत कम पड़ेगी और स्टेशन परिसर में स्वच्छता बनाए रखना आसान होगा। चल रहे 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत रेलवे की नई पहल कचरा प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण होगी।
ज्वाइंट डायरेक्टर अमिता भल्ला का कहना है कि रेलवे बोर्ड की इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्टेशनों पर कचरे के ओवरफ्लो को कम करना, सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना और ठोस कचरे के प्रबंधन में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है। वेस्ट कांपेक्टर स्मार्ट बिन में इन बिल्ट कांपेक्शन सिस्टम होगा, जिससे जमा कचरे का आयतन कम किया जा सकेगा।
इससे कम जगह में अधिक कचरा एकत्र किया जा सकेगा और डस्टबिन के जल्दी भरने की समस्या कम होने की उम्मीद है। रेलवे ने ऐसे स्थानों पर इनके इस्तेमाल को उपयुक्त माना है, जहां सूखे कचरे की मात्रा अधिक होती है।
बाजार में उपलब्ध स्मार्ट बिन में कई आधुनिक सुविधाएं हो सकती हैं। इनमें सोलर पावर से संचालन, फिल लेवल मानीटरिंग सेंसर, आटोमेटेड अलर्ट, टच फ्री आपरेशन और डिजिटल मानीटरिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इनसे बिन के भरने की स्थिति की निगरानी और समय पर कचरा उठाने की व्यवस्था को बेहतर किया जा सकता है।
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ज्वाइंट डायरेक्टर ने स्मार्ट बिन की स्थापना के बाद उनके प्रदर्शन और वास्तविक लाभों की निगरानी करने को कहा है। प्रायोगिक स्तर पर परिणाम संतोषजनक पाए जाने पर भविष्य में भारतीय रेलवे के अन्य स्टेशनों पर भी इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने की संभावना बन सकती है।
