गोरखपुर, जेएनएन। मानसिक शांति के लिए दी जाने वाली दवा एल्प्राजोलाम भी नकली निकल गई है। इस दवा में एल्प्राजोलाम की मात्रा ही नहीं मिली है। हालांकि यह दवा नुकसान नहीं करेगी लेकिन मर्ज को भी दूर नहीं करेगी। पशुओं का दूध उतारने के लिए इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन भी नकली मिली है।

ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने पिछले दिनों जिला अस्पताल के सामने स्थित एक दुकान से एल्प्राजोलाम टैबलेट का सैंपल लिया था। इसे जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच में दवा नकली होने की पुष्टि हुई।

नौसड़ में मिला था ऑक्सीटोसिन

25 सितंबर 2018 को डीएलए प्रभात कुमार तिवारी और ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने नौसड़ स्थित पशु आहार बेचने वाली दुकान पर छापा मारा था। दुकानदार रामकिशन ने ऑक्सीटोसिन के कई वायल छुपा कर रहे थे। वायल का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। जांच में यह भी नकली मिला है।

10 महीने में लिए गए 69 सैंपल

ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि अप्रैल 2018 से जनवरी 2019 तक जिले में 69 दवाओं के नमूने भरकर जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से 58 की रिपोर्ट आ चुकी है। दो दवाएं अधोमानक और एक दवा मिथ्या छाप की श्रेणी में मिली है।

पांच लाख से ज्यादा की दवाएं सीज

बिना लाइसेंस संचालित हो रही दुकानों की जांच में मिली दवाएं सीज कर दी जाती हैं। औषधि प्रशासन विभाग ने बिना लाइसेंस संचालित हो रही तीन दुकानों में तकरीबन पांच लाख रुपये की दवाएं सीज की जा चुकी हैं।

कराया जा रहा मुकदमा

इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार का कहना है कि इंस्पेक्टरएल्प्राजोलाम और ऑक्सीटोसिन के सैंपल फेल हो गए हैं। एल्प्राजोलाम बनाने वाली हिमाचल की कंपनी के खिलाफ एफआइआर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऑक्सीटोसिन पर न तो निर्माता और न ही कोई अन्य जानकारी उपलब्ध थी। जिसके पास ऑक्सीटोसिन मिली है उसके खिलाफ एफआइआर होगी।

Posted By: Jagran