यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Gorakhpur Weather: गोरखपुर में झूमकर बरसे बादल, नौ साल का रिकाड टूटा- अगले दो दिनों तक वर्षा के आसार
Gorakhpur Today Weather गोरखपुर में गुरुवार को जमकर बारिश हुई। देर रात से शुरू हुई बारिश सुबह तक जारी रही। ...और पढ़ें

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। पिछले 24 घंटे में जिले में झूमकर वर्षा हुई है। मौसम विभाग ने संभावना जतायी है कि अगले तीन दिनों तक फिर वर्षा की संभावना है। बुधवार को हुई अच्छी वर्षा से धान की फसल फिर से लहलहाने लगी है। किसान के चेहरे पर फिर चमक देखी जा रही है। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि आगामी 18 सितंबर तक जिले में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। जिले के किसान वर्षा न होने से परेशान थे, लेकिन सप्ताह भीतर करीब 100 मिलीमीटर वर्षा से हुई है। इससे किसान उत्साहित देखे जा रहे हैं।
एक दिन में बारिश का रिकार्ड टूटा
बीते 24 घण्टे में जिले में 144 मिलीमीटर वर्षा हुई है। बीते 9 वर्षों में सितंबर माह एक दिन में इतनी वर्षा नहीं हुई है। इससे पूर्व 18 सितंबर 2012 को एक दिन में 155.7 मिलीमीटर वर्षा हुई थी।
इस वर्ष कम हुई है वर्षा
बता दें इस वर्ष वर्षा कम होने से 1.5 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की गई है, जबकि पिछले वर्ष 1.52 लाख हेक्टेयर में धान की फसल बोई गई थी। उरुवा क्षेत्र के कई किसान ऐसे रहे, जिन्होंने दस दिन पूर्व अपने धान की फसल को जुतवा दिया था। हालांकि उसके बाद से जिले में मानसून सक्रिय है। उसके बाद से रुक-रुक कर लगातार वर्षा हो रही है। बुधवार को तो बादल झूमकर बरसे। सुबह से शुरू हुआ वर्षा का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। कई स्थानों पर खेतों में पानी लग गया है।
वर्षा से दलहनी फसलों को भी होगा लाभ
जिला कृषि अधिकारी देवेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि हाल के दिनों में हुई वर्षा धान के लिए अमृत समान है। यह वर्षा दलहनी फसलों के लिए भी लाभदायी है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में करीब ढाई हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर, करीब 100 हेक्टेयर उड़द व आठ हेक्टेयर में मूंग की खेती की गई है। वर्षा रुक-रुक हो रही है। ऐसे में यह सभी फसलों के लिए लाभदायी है।
करें उर्वरक का छिड़काव, लेकिन सावधानी से
वर्षा को देखते हुए तमाम किसान अपने खेतों में यूरिया, जिंक सल्फेट व पोटाश का छिड़काव कर रहे हैं। इसके भुरकाव से धान की फसल को लाभ होगा, लेकिन कालानमक व सांभा की खेती करने वाले किसानों को थोड़ी सावधानी अपनानी होगी। कृषि विज्ञान केंद्र बेलीपार के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.एसके ताेमर का कहना है कि सांभा व कालानमक की खेती करने वाले किसान भुरकाव से पहले यह देख लें कि उनकी फसल में कहीं झुलसा रोग तो नहीं लगा हुआ है।
ऐसे करें फसल का बचाव
इस रोग में पत्तियां ऊपर की तरफ नोक वाले हिस्से से सूखती हैं। फसल में ऐसा दिखे तो वह तत्काल स्ट्रेप्टो साइक्लीन 12 ग्राम, कापर आक्सीक्लोराइड 200 ग्राम का 200 लीटर पानी में घोल बनाएं और उसका प्रति एकड़ छिड़काव करें। इस रोग का निदान होने के बाद 45 किलो यूरिया, 5 किलो जिंग सल्फेट व 40 किलो म्यूरेट आफ पोटाश को मिलाकर एक एकड़ फसल पर ऊपर से भुरकाव करें। इससे फसल को फसल को लाभ मिलेगा। कुछ स्थानों पर बालियां निकलने लगीं हैं। वहां हरदिया रोग से बचाव के लिए प्रोपीकोना जोल एक एमएल एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

जलमग्न हुए कई मोहल्ले
मूसलधार वर्षा से महानगर के कई इलाकों में जलभराव हो गया। हांसूपुर से राजघाट जाने वाली सड़क पर घंटों पानी रहा। पादरी बाजार, धर्मशाला अंडरपास, विजय चौक से आर्यनगर चौराहा, सिविल लाइंस में जलभराव के कारण छात्रों को दिक्कत हुई। गोरखपुर विकास प्राधिकरण की कालोनियों में भी घंटों पानी जमा रहा। नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि सुबह वर्षा शुरू होते ही निगम के अफसरों व कर्मचारियों को क्षेत्र में भेज दिया गया। निचले इलाकों में पंपिंग सेट शुरू करा दिए गए। वर्षा के बाद कुछ ही देर में पानी निकल गया।
