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गोरखपुर विश्वविद्यालय की 75 साल की विरासत को सहेजने की तैयारी, बंद पड़ी पुरानी पत्रिका का फिर होगा प्रकाशन

Published: Tue, 13 Oct 2026 03:49 PM (IST)

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय अपनी 75 साल पुरानी शैक्षणिक विरासत को सहेजने और छात्रों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

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HighLights

  1. विश्वविद्यालय की 75 साल पुरानी विरासत सहेजी जाएगी।

  2. बंद हो चुकी पुरानी पत्रिका का पुन: प्रकाशन होगा।

  3. छात्रों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक विरासत को सहेजने के साथ विभागों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में है। स्थापना काल से प्रकाशित होने वाली, लेकिन दशकों पहले बंद हो चुकी ‘गोरखपुर विश्वविद्यालय पत्रिका’ के पुराने अंकों को संकलित कर दोबारा प्रकाशित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय की 75 वर्षों की यात्रा पर पुस्तक तैयार करने की योजना भी है।

सोमवार को कुलपति प्रो. केपी सिंह ने हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता, संस्कृत एवं प्राकृत भाषा, दर्शनशास्त्र, उर्दू और अंग्रेजी विभागों का दौरा कर शैक्षणिक व शोध गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान शिक्षकों ने अपनी अकादमिक उपलब्धियों, शोध कार्यों और भावी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। कुलपति ने विभागों के विकास और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।

संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग में कुलपति ने संस्कृत की पढ़ाई को प्रोत्साहित करने के लिए सरस्वती विद्यालयों जैसे संस्थानों से संपर्क बढ़ाने का सुझाव दिया। पालि स्नातक पाठ्यक्रम में श्रीलंका, इंडोनेशिया, चीन, जापान और थाईलैंड के विद्यार्थियों को आकर्षित करने के साथ विदेशी विश्वविद्यालयों से अकादमिक सहयोग विकसित करने पर भी जोर दिया। ज्योतिष में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया।

योग पाठ्यक्रम को एकीकृत करने का सुझाव
दर्शनशास्त्र विभाग में कुलपति ने एमए इन योग और पीजी डिप्लोमा इन योग पाठ्यक्रमों को एकीकृत कर डिग्री और सर्टिफिकेट कोर्स के रूप में संचालित करने का सुझाव दिया। उर्दू विभाग में डा. साजिद हुसैन और डा. महबूब हसन ने विभागीय गतिविधियों व अकादमिक उपलब्धियों की जानकारी दी। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. सुनीता मुर्मू ने विभाग की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। इस दौरान कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंत राव आदि मौजूद रहे। (विज्ञप्ति)

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