गोरखपुर में पेंशन के इंतजार में जिंदगी से हार गए प्रेम नारायण, सिस्टम पर उठे सवाल
सेवानिवृत्त रेलकर्मी प्रेम नारायण डेढ़ साल तक अपनी पेंशन के लिए संघर्ष करते रहे और अंततः इस इंतजार में उनका ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
सेवानिवृत्त रेलकर्मी प्रेम नारायण का पेंशन के इंतजार में निधन।
अदालत के आदेशों के बावजूद रेलवे ने रोकी थी पेंशन।
परिवार आर्थिक संकट में, यूनियन ने उठाया मुद्दा।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। डेढ़ साल से पेंशन की आस में अदालत से लगायत रेलवे अधिकारियों की चौखट तक दौड़ लगा रहे सेवानिवृत्त रेलकर्मी प्रेम नारायण आखिरकार जिंदगी से भी हार गए। न रेलवे प्रशासन ने उनकी सुधि ली और न ही ऊपर वाले ने रहम दिखाया।
31 मार्च 2025 को यांत्रिक कारखाना से सेवानिवृत्त प्रेम नारायण को जब पेंशन नहीं मिला तो दफ्तर का चक्कर लगाने लगे। चप्पल घिस गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। थकहार कर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने न्याय दिया तो आदेश का पत्र लेकर रेलवे के आला अधिकारियों के पास पहुंचे। एक से दूसरे टेबल पर घूमते रहे, आश्वासन मिलते रहे। पिछले सप्ताह उनकी मृत्यु हो गई। अफसरों का आश्वासन धरा रह गया। पत्नी और बेटा की आंखें सूनीपड़ गई हैं।
यांत्रिक कारखाना के तकनीशियन-1 के पद पर तैनात प्रेम नारायण को वर्ष 1992 के एक निजी आपराधिक प्रकरण के चलते 27 जुलाई 1999 को रेलवे की सेवा से हटा दिया गया। लेकिन, सक्षम अपीलीय अधिकारी ने 22 नवंबर 1999 को उन्हें दोषमुक्त करार देते हुए सेवा में बहाल कर दिया। वे लगभग 26 वर्ष तक सवेतन रेलवे की सेवा करते रहे।
जब, सेवानिवृत्ति का समय आया तो रेलवे प्रशासन को प्रेम नारायण के आपराधिक मामले की याद आ गई। सेवानिवृत्ति के समय रेलवे प्रशासन ने उन्हें ग्रेच्युटी तो दे दिया, लेकिन पेंशन रोक दी। सक्षम अपीलीय अधिकारी के आदेश को भी ताक पर रख दिया। परिवार पर आर्थिक संकट गहराया तो उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण इलाहाबाद में वाद प्रस्तुत किया। मामला उच्च न्यायालय इलाहाबाद में पहुंच गया।
उच्च न्यायालय ने दस सितंबर 2026 को रेलवे प्रशासन की आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और प्रेम नारायण के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। हताश प्रेम नारायण कार्मिक के उच्च अधिकारियों व महाप्रबंधक से मिलकर पेंशन शुरू कराने की गुहार लगाते रहे। उनका आरोप था कि उनके जैसे कई मामलों में सेवानिवृत्त रेलकर्मियों को पेंशन का लाभ मिल रहा है। सिर्फ उनके साथ भेदभाव हो रहा है। उनके घर की हालत खराब है। जीवन-यापन करना मुश्किल हो गया है।
उनका पेंशन यथाशीघ्र चालू किया जाए, अन्यथा उनका परिवार मृत्यु के कगार पर पहुंच जाएगा। परिवार के लोग तो जीवित हैं, लेकिन निराश प्रेम नारायण की 25 अक्टूबर, 2026 को मृत्यु हो गई। बातचीत में उनके पुत्र शक्ति कुमार की आवाज नहीं निकल पा रही थी। रोते हुए बताने लगे, पापा बहुत दबाव में जी रहे थे। अचानक सीने में दर्द हुआ। एक निजी अस्पताल ले गए। इलाज के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई। मां भी बीमार हैं, वह बार-बार महाप्रबंधक से मिलने की बात कर रही हैं। कुछ समझ में नहीं आ रहा क्या करें, कहीं कोई सुधि लेने वाला नहीं है।
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एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री बसंत चतुर्वेदी बताते हैं कि यूनियन के मंडल मंत्री संजय कुमार पांडेय ने प्रेम नारायण के मुद्दे को उठाया था। संबंधित अधिकारियों को चिट्ठी लिखी थी, किसी ने संज्ञान नहीं लिया। जल्द ही इस प्रकरण को रेल मंत्रालय व बोर्ड के समक्ष उठाया जाएगा।
