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काटकर लिनेन बेचेगा रेलवे, अब चादर से नहीं बन सकेगा कुर्ता-पायजामा

By Prem Narayan DwivediEdited By: Vivek Shukla
Published: Fri, 14 Aug 2026 01:20 PM (IST)

रेलवे अब चलन से बाहर हो चुके लिनेन को काटकर बेचेगा ताकि उनका उपयोग वस्त्र बनाने में न हो सके। ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. वायरल वीडियो के बाद रेलवे ने लिनेन बिक्री नियम बदले।

  2. कंडम लिनेन को अब दो तिहाई काटकर बेचा जाएगा।

  3. इससे चादरों का वस्त्र के रूप में दुरुपयोग रुकेगा।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। कुछ दिन पहले इंटरनेट मीडिया पर कुर्ता पहने किसी व्यक्ति का वीडियो प्रसारित हो गया था। कुर्ता पर रेलवे का लोगो साफ दिख रहा था। वीडियो कई दिनों तक चर्चा में रहा। लोग रेलवे को लेकर तरह-तरह के कमेंट भी करते रहे। इसे लेकर रेलवे की बदनामी हो रही थी और व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे थे।

ऐसी कोई तस्वीर या वीडियो रेलवे की छवि पर बट्टा न लगाए, इसके लिए रेल प्रशासन ने संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब रेलवे प्रशासन चलन से बाहर लिनेन को काटकर बिक्री के लिए बोली आमंत्रित करेगा, ताकि बिकने के बाद कोई चादर का उपयोग पहनने के लिए वस्त्र सिलवाने में न कर सके।

रेलवे प्रशासन समय-समय पर कंडम लिनेन की बोली लगाकर बेचता है। लोग बिक्री किए गए लाट से बेडशीट आदि निकालकर उसका उपयोग वस्त्र बनवाकर पहनने में न कर सकें, इसके लिए रेलवे प्रशासन ने बेडशीट आदि को दो तिहाई काटकर बेचने का निर्णय लिया है।

इस तरह रेलवे प्रशासन ने बिक्री की गई लिनेन के वस्त्र के रूप में उपयोग पर रोक लगाने की कवायद की है। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार ने बताते हैं कि यह रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन है। इसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है।

हालांकि, वातानुकूलित कोचों से गायब होने वाले बेडरोल का दुरुपयोग रोकना अब भी बड़ी चुनौती है। जबकि, पिछले दिनों इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित रेलवे के लिनेन से बने वस्त्र पहने व्यक्ति के वीडियो में इसे चोरी की चादर से निर्मित बताया गया था। गोरखपुर लाउंड्री से प्रतिदिन करीब 24 हजार बेडरोल के पैकेट तैयार होते हैं, जिन्हें यहां से बनकर चलने वाली 32 ट्रेनों के एसी कोचों के यात्रियों को उपलब्ध कराया जाता है।

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संसद तक में उठ चुका है लिनेन चोरी का मामला
ट्रेनों के एसी कोचों से चोरी होने वाले लिनेन का मामला संसद तक में उठ चुका है। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने सभी मंडलों से हिसाब मांगा था। पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने जो रेलवे बोर्ड को आंकड़ा भेजा वह चौंकाने वाला था।

गोरखपुर और ऐशबाग स्थित मैकेनाइज्ड लाउंड्री में पांच साल में लगभग 3 करोड़ 73 हजार रुपये के लिनेन (बेडरोल- बेडशीट, तौलिया, पिलो कवर और कंबल आदि) गायब हो चुके हैं। सिर्फ गोरखपुर लाउंड्री से ही छह माह में 15.40 लाख कीमत के 15,871 लिनेन गायब हो चुके हैं।

बेडरोल की उम्र है निर्धारित
रेलवे ने बेडरोल की उम्र भी निर्धारित की है। एक बेडशीट एक साल, कंंबल दो साल तथा तौलिया और पिलो कवर आदि नौ-नौ माह चलते हैं। इसके बाद इन्हें कंडम घोषित कर दिया जाता है। स्टोर डिपो के माध्यम से बड़े पैमाने पर कंडम लिनेन की नीलामी की जाती है।