गोरखपुर में खेल कोटे से मिली थी नौकरी, 40 साल बाद अब 25 लाख की वसूली की तैयारी; व्यवस्था पर उठे सवाल
गोरखपुर में रेलवे के एक कर्मचारी को खेल कोटे से मिली नौकरी में 40 साल पहले बढ़े वेतनमान पर अब ...और पढ़ें

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
खेल कोटे से भर्ती कर्मचारी से 25 लाख की वसूली।
40 साल पहले बढ़े वेतनमान पर अब हो रही रिकवरी।
सुप्रीम कोर्ट के नियमों का हवाला देकर कर्मचारी संगठन विरोध में।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। खेल कोटे से हॉकी खिलाड़ी के रूप में रेलवे में नौकरी मिली, महाप्रबंधक के आदेश से वेतनमान बढ़ा और चार दशक तक उसी आधार पर वेतन मिलता रहा। अब सेवानिवृत्ति के समय उसी बढ़े वेतन की वसूली की जा रही है। लेखा सहायक राज कुमार यादव से 31 अक्टूबर को करीब 25 लाख रुपये की वसूली की तैयारी है।
एक दूसरे कर्मचारी निर्मला रौतेला से करीब 25 लाख रुपये की रिकवरी हो चुकी है। रेलवे की इस कार्यप्रणाली पर कर्मचारी संगठनों ने सवाल उठाया है। कहना है कि जब रेलवे ने 40 साल तक बढ़े वेतनमान पर वेतन दिया, तो अब सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी से उसकी वसूली कैसे की जा सकती है?
राज कुमार यादव की नियुक्ति 14 अप्रैल 1986 को पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर के लेखा विभाग में खेल कोटे (हाकी) से हुई थी। तत्कालीन महाप्रबंधक वीके चौबे ने उनके खेल से प्रभावित होकर अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए उनका वेतनमान 260-400 रुपये से बढ़ाकर 950-1500 रुपये किया था। राजकुमार, निर्मला समेत दर्जनों कर्मचारियों का वेतनमान इस आधार पर बढ़ा और बढ़े वेतनमान पर वेतन मिलना शुरू हो गया।
रेलवे प्रशासन ने चतुर्थ वेतनमान लागू होने पर वर्ष 1988 के नियम का हवाला देते हुए कर्मचारियों का वेतनमान घटाकर 1350 कर दिया। वेतनमान घटते ही कर्मचारियों ने महाप्रबंधक से लेकर कार्मिक विभाग के उच्च अधिकारियों तक शिकायत की।
स्थायी वार्ता तंत्र (पीएनएम) की बैठक में मुद्दा उठा। लेखा विभाग ने माना कि इन मामलों में दो फरवरी 1988 में दिए गए निर्देश लागू नहीं होने चाहिए। बोर्ड के 21 फरवरी 1986 में जो निर्देश दिए थे वही लागू होंगे, जो चतुर्थ वेतनमान के लागू होने से पहले के हैं।
उसके बाद वेतनमान प्रकरण का पटाक्षेप हो गया था। अब महाप्रबंधक के आदेश को दरकिनार कर राज कुमार यादव के वेतन से रिकवरी का आदेश जारी किया गया है। फरवरी में निर्मला रौतेला की सेवानिवृत्ति के समय करीब 25 लाख रुपये की वसूली की गई।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट (रफीक मसीह केस) और रेलवे बोर्ड के नियम (आरबीई संख्या 72/2016) के अनुसार सेवानिवृत्ति पर या पांच साल से अधिक पुराने मामलों में रिकवरी नहीं की जा सकती। नेशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवे के महामंत्री डॉ. एम राघवैया ने इसे स्थायी वार्ता तंत्र के एजेंडे में दर्ज कराया है।
कर्मचारी नेता नवीन कुमार मिश्रा ने कहा कि कर्मचारी से 20 से 25 लाख रुपये की रिकवरी की जा रही है, जबकि 30 प्रतिशत रिकवरी आयकर के रूप में हो चुकी है। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार बताते हैं कि प्रकरण संज्ञान में नहीं है।
