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गोरखपुर में वर्दीधारी ने बच्ची को उतारा मौत के घाट, जिला अस्पताल से किया था अपहरण; पुलिस महकमे पर अपराधों का दाग

Published: Thu, 30 Jul 2026 10:10 AM (IST)

गोरखपुर पुलिस पर पिछले कुछ वर्षों में लूट, भ्रष्टाचार, दुष्कर्म और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इन घटनाओं ने ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

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HighLights

  1. गोरखपुर पुलिस पर लूट, भ्रष्टाचार, दुष्कर्म के आरोप।

  2. कई पुलिसकर्मी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार।

  3. इन घटनाओं से पुलिस महकमे की साख घटी।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। जिला अस्पताल से अपहरण की गई बच्ची का शव गुरुवार सुबह बरामद हो गया है। गोरखपुर में पुलिस की वर्दी पर दाग लगने की यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिसकर्मियों पर लूट, भ्रष्टारिचार, गबन, दुष्कर्म, रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। कई मामलों में मुकदमे दर्ज हुए, गिरफ्तारियां हुईं और विभागीय कार्रवाई भी की गई। इन घटनाओं ने हर बार पुलिस महकमे की कार्यशैली और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।

अगस्त 2022 में चौरीचौरा क्षेत्र में तैनात रहे दरोगा विनय कुमार पर कुशीनगर की युवती ने शादी का झांसा देकर पांच वर्ष तक दुष्कर्म करने और दो बार गर्भपात कराने का आरोप लगाया था। एसएसपी के निर्देश पर मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद दिसंबर 2024 में गोरखपुर की एक फिजियोथेरेपी छात्रा ने एक दरोगा पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, गोरखनाथ मंदिर में शादी करने, गाजियाबाद ले जाकर आपत्तिजनक वीडियो बनाने और अप्राकृतिक संबंध बनाने का आरोप लगाया। इस मामले में भी केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।

एक अप्रैल 2024 को बेनीगंज चौकी प्रभारी आलोक सिंह पर व्यापारी के 50 लाख रुपये हड़पने का आरोप सही मिलने पर उन्हें साथी समेत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। 10 जून 2024 को एम्स थाना क्षेत्र की जगदीशपुर चौकी पर तैनात दरोगा व सिपाहियों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हुआ। 31 जुलाई 2024 को खोराबार क्षेत्र के दो सिपाहियों को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

22 नवंबर 2024 को पिपराइच थाने में तैनात प्रशिक्षु महिला दारोगा अंकिता पांडेय भी 10 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ी गई। पांच अगस्त 2025 को राजघाट पुल के पास व्यापारी से 90 हजार रुपये की लूट और उत्पीड़न के मामले में तत्कालीन नौसढ़ चौकी प्रभारी शुभम श्रीवास्तव समेत पांच पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई। जांच में संलिप्तता सामने आने पर आरोपित दरोगा ने बाद में आत्मसमर्पण किया और मुकदमा दर्ज कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।

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वहीं, तीन फरवरी 2025 को जंक्शन पर बंगाल की युवती को झांसे में लेकर लूट और उत्पीड़न करने वाले सिपाही अभिषेक यादव की घटना ने भी पुलिस की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया। इन घटनाओं ने साबित किया कि वर्दी पर लगने वाला एक दाग पूरे पुलिस महकमे की साख को प्रभावित करता है।

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