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'खेती के नाम पर भेजा, बनवा दिया मुर्गी फार्म का मजदूर', परदेस में अधिकृत एजेंसियों के जाल में फंसे यूपी के युवा

By Navneet Prakash TripathiEdited By: Vivek Shukla
Published: Thu, 13 Aug 2026 12:46 PM (IST)

गोरखपुर सहित यूपी के कई युवा अधिकृत एजेंसियों के झांसे में आकर विदेश में बंधुआ मजदूरी का शिकार हो रहे ...और पढ़ें

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HighLights

  1. रामललित को मलेशिया में कृषि के बजाय मुर्गी पालन में लगाया गया।

  2. ई-माइग्रेट पोर्टल पर यूपी से 547 धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज।

  3. एजेंसियां निर्धारित शुल्क से दो-तीन गुना अधिक रकम वसूलती हैं।

नवनीत प्रकाश त्रिपाठी, गोरखपुर। कबूतरबाजों से सावधान रामललित ने विदेश जाने के लिए अधिकृत एजेंसी पर भरोसा किया। दो साल पहले परदेस में रोजगार तलाशते वह गोरखपुर के मोहरीपुर से मलेशिया पहुंचे। चेन्नई की एजेंसी ने उन्हें कृषि कार्य करने की जानकारी देकर भेजा, लेकिन वहां वह मुर्गी पालन और अंडों के रखरखाव के काम में लगा दिए गए।

बकौल रामललित रखरखाव के दौरान यदि एक भी अंडा टूट जाता था, तो मालिक उन्हें धूप में खड़ाकर बुरी तरह से पीटता था। जितने अंडे टूटते थे उनकी कीमत वेतन से काट लेता था। एक स्थानीय नागरिक की मदद से उन्होंने अपने साथ हुई धोखाधड़ी और मालिक के अमानवीय व्यवहार की जानकारी परिवारीजन को दी, तो उन्होंने ई-माइग्रेट पोर्टल के जरिए एजेंसी की शिकायत विदेश मंत्रालय से की।

विदेश मंत्रालय से नोटिस जारी होते ही एजेंसी ने सक्रियता दिखाते हुए रामलिलत की वापसी सुनिश्चित कराई। बाद में परिवार के लोगों से बातचीत कर शिकायत वापस करा दिया। इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। ई-माइग्रेट पोर्टल पर बाकायदा पंजीकृत अधिकृत एजेंसी की धोखाधड़ी का शिकार होने वाले रामललित इकलौते व्यक्ति नहीं है।

ई-माइग्रेट पोर्टल पर दर्ज शिकायतों से पता चलता है कि इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होने वालों की संख्या सैकड़ों में है। इस पोर्टल पर मार्च 2026 तक उत्तर प्रदेश के पते पर 158 प्लेसमेंट एजेंसियां और 150 एजेंट पंजीकृत मिले। इसमें गोरखपुर के पते पर पंजीकृत 35 प्लेसमेंट एजेंसियां भी शामिल हैं।

मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच प्रदेश में इन एजेंसियों और एजेंटों के विरुद्ध धोखाधड़ी की 547 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। अधिकांश शिकायतों में था कि जिस काम का आश्वासन देकर विदेश भेजा गया, परदेस पहुंचने के बाद उससे अलग काम पर लगाया गया। इसके साथ ही नियोक्ता द्वारा बताई गई सेवा शर्तों का उल्लंघन की शिकायतें भी बड़ी संख्या में हैं।

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निर्धारित शुल्क की तुलना में दो से तीन गुणा तक होती है वसूली

गोरखपुर-बस्ती मंडल से रोजगार की तलाश में विदेश जाने वाले युवाओं की तादाद बहुत अधिक है। यही वजह है के चेन्नई, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों के पते पंजीकृत प्लेसमेंट एजेंसियों के कई कर्मचारी व एजेंट गोरखपुर-बस्ती मंडल के जिलों में सक्रिय हैं। कई एजेंसियों के एजेंटों ने दोनों मंडलों के जिला मुख्यालयों के बाहरी इलाकों में बाकायदा अपना कार्यालय भी खोल रखा है।

एसोसिएशन आफ यूपी प्लेसमेंट एजेंसी के सदस्य गौरव दूबे बताते हैं कि इन एजेंटों द्वारा न तो विदेश मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन किया जाता है और न ही विदेश जाने वालों को काम और सुरक्षा की कोई गारंटी दी जाती है।

रोजगार के लिए विदेश जाने वालों से विदेश मंत्रालय की ओर से निर्धारित शुल्क की तुलना में दो से तीन गुणा तक अधिक रकम भी वसूलते हैं। विदेश मंत्रालय ने प्लेसमेंट एजेंसियों व एजेंटों के लिए अधिकृत रूप से 30 हजार रुपये सेवा शुल्क निर्धारित है। ई-माइग्रेट पोर्टल पर अधिक रकम वसूलने की भी कई शिकायतें दर्ज हैं।

 

विदेश जाने के लिए अधिकृत एजेंट या एजेंसी को ही माध्यम बनाएं, पर यह अवश्य जांच लें कि उनके विरुद्ध पहले से कोई शिकायत तो दर्ज नहीं है। ऐसा हो तो उसकी सेवा लेने से परहेज करें। विदेश जाने से पहले वर्क परमिट और वर्क एग्रीमेंट की वैधता की जांच अवश्य कर लें।

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-रास बिहारी चतुर्वेदी, सहायक निदेशक क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय गोरखपुर