गोरखपुर-बस्ती से खाड़ी देशों का 'खौफनाक सफर': जालसाज एजेंट छीन रहे पासपोर्ट, युवा बन रहे बंधुआ मजदूर
गोरखपुर-बस्ती मंडल के युवा खाड़ी देशों में रोजगार की तलाश में अपंजीकृत एजेंटों के जाल में फंसकर बंधक बनाए जा ...और पढ़ें

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HighLights
गोरखपुर-बस्ती के युवा खाड़ी देशों में एजेंटों द्वारा शोषित।
अवैध एजेंटों द्वारा पासपोर्ट जब्त कर बंधक बनाया जा रहा।
ई-माइग्रेट पोर्टल सुरक्षित विदेश रोजगार के लिए आवश्यक माध्यम।
नवनीत प्रकाश त्रिपाठी, गोरखपुर। मजदूरी कर गुजर-बसर करने वाले झंगहा के राजधानी गांव के अशोक की तीन बेटियां हैं और एक बेटा। दो बहनों को भी ब्याहना है। किसी तरह से दो वक्त का भोजन तो मिल जाता था, लेकिन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और बहनों के विवाह के लिए पैसे का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। परदेस में अच्छी कमाई की आस लिए एक एजेंट के जरिए पिछले साल नवंबर में दुबई चले गए।
एजेंट ने उन्हें एक कंपनी में पेंट-पालिस का काम करने की बात कहकर भेजा था। बताया था कि इस काम के लिए उन्हें 1200 दिरहम मिलेंगे। अशोक जब दुबई पहुंचे तो कंपनी के लोगों ने वीजा-पासपोर्ट छीने और उन्हें बंधक बनाकर दूसरे काम में लगा दिया। 12 से 14 घंटे तक काम के बदले में एक दिन का 10 दिरहम भुगतान मिलता था। इसी में रहने और खाने का भी इंतजाम करना पड़ता।
दो माह बाद उनकी इस स्थिति के बारे में पत्नी सरिता देवी को पता चला। पति की हालत जानकार परेशान पत्नी सरिता उन्हें वापस लाने के लिए कई अधिकारियों के पास गईं, लेकिन किसी ने उनकी फरियाद पर ध्यान नहीं दिया। बाद में उन्होंने मदद फाउंडेशन के संस्थापक राजेश मणि से मदद की गुहार लगाई। उनके प्रयास से जून के आखिरी सप्ताह में अशोक घर लौटे। इसी तरह पनियरा महराजगंज के आशीष इस साल जनवरी में एक एजेंट के माध्यम से दुबई गए थे।
एजेंट ने बताया था कि 15500 रुपये उन्हें वेतन मिलेगा। दुबई पहुंचते ही उन्हें बंधक बना लिया गया। परिवार के लोगों को कुछ दिन बाद उनको बंधक बनाए जाने की जानकारी हुई। इसके बाद से ही पत्नी रोशनी कुछ शुभचिंतकों की मदद से विदेश मंत्रालय से लेकर दुबई स्थिति भारतीय दूतावास के अधिकारियों तक से अलग-अलग माध्यमों से कई बार संपर्क किया, लेकिन अभी तक उन्हें पति के मुक्त होकर घर आने की कोई उम्मीद नजर नहीं आई।
हार कर उन्होंने दुबई में रह रहे एक रिश्तेदार के माध्यम से वहां सक्रिय एक एजेंट से संपर्क साधा तो आशीष की वापसी के लिए उसने 50 हजार रुपये की मांग की। अब परिवार के लोग ब्याज पर उधार लेकर पैसे का इंतजाम करने में जुटे हैं। अशोक और आशीष तो बस उदाहरण हैं। गोरखपुर-बस्ती मंडल के युवाओं को खाड़ी देशों में बंधक बना लिए जाने की खबरें अक्सर आती रहती हैं। इसकी प्रमुख वजह विदेश जाने के लिए अपंजीकृत एजेंटों को माध्यम बनाना है।
दोनों मंडलों के करीब-करीब सभी जिलों में खाड़ी देशों में काम करने का प्रशिक्षण देने के नाम पर खुले सेंटर के माध्यम से कथित एजेंट इन युवाओं को अपना शिकार बनाते हैं। इनसे जुड़े एजेंट ग्रामीण इलाकों में सक्रिय रहकर बेरोजगार युवाओं की तलाश करते हैं और अच्छी कमाई का सब्जबाग दिखाकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। इन युवाओं के विदेश पहुंचते ही पासपोर्ट जब्त कर उन्हें बंधक बना लिया जाता है। बाद में एजेंट से संपर्क करने पर वह या तो पल्ला झाड़ लेते हैं या फिर बड़ी रकम वसूल कर बंधक बनाए गए लोगों को वापस बुलाने में मदद को तैयार होते हैं।
जानकारी के अभाव में ई-माइग्रेट पोर्टल का नहीं करते इस्तेमाल
रोजगार की तलाश में दूसरे देशों में जाने वाले युवाओं के लिए विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2014 में ई-माइग्रेट पोर्टल लांच किया था। इस पोर्टल पर विदेश में रोजगार के बारे में जानकारी तो उपलब्ध होती ही है, सेवा शर्तों और वेतन के बारे में भी विस्तार से बताया जाता है। साथ ही विदेश जाने वालों को पूरी सुरक्षा की भी गारंटी भी होती है। पहले इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। रजिस्ट्रेशन के दौरान योग्यता सहित अन्य जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होती है।
इस पोर्टल पर पंजीकृत एजेंटों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध है, जिनके माध्यम से रोजगार के लिए विदेश जाया जा सकता है। विदेश में रोजगार के अवसर तलाशने वाले युवा जानकारी के अभाव में इस पोर्टल का इस्तेमाल नहीं करते और एजेंटों की जालसाजी का शिकार बन जाते हैं। पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराकर विदेश जाने वाले लोगों से संबंधित देश में स्थिति भारतीय दूतावास के अधिकारी हमेशा संपर्क में रहते हैं और उनकी सुविधाओं का ख्याल रखते हैं।
रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पोर्टल की वेबसाइट https://emigrate.gov.in पर लॉगिन करना होगा। इसमें नौकरी के अवसर, नियोक्ता, अधिकृत एजेंट और रिजस्ट्रेशन करने के विकल्प दिखाई देंगे। नौकरी के अवसर विकल्प में किस देश में किस-किस क्षेत्र में कितनी रिक्तियां हैं, अधिकृत एजेंट और भर्ती एजेंसी के बारे में भी जानकारी पूरी जानकारी उपलब्ध रहती है। सहायक सेवायोजन अधिकारी पवन पटेल कहते हैं कि रोजगार की तलाश में विदेश जाने के लिए सही माध्यम का चुनाव बेहद जरूरी है। ई-माइग्रेट पोर्टल इसके लिए सबसे उपयुक्त माध्यम है।
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नई बात नहीं है गोरखपुर-बस्ती मंडल में पलायन
पूर्वी उत्तर प्रदेश, खासकर गोरखपुर-बस्ती मंडल से युवाओं का पलायन कोई नई बात नहीं है। अंग्रेजी हुकूमत में बड़ी संख्या में यहां के किसानों को गिरमिटिया मजदूर बनाकर फिजी, मारीशस, सूरीनाम और त्रिनिदाद आदि देशों भेजा था। तभी से यह अंचल ‘रोजगार के लिए पलायन’ की त्रासदी से उबर नहीं सका। कभी रंगून और सिंगापुर में रोजगार की तलाश में जाने वाले गोरखपुर-बस्ती मंडल के युवा अब खाड़ी देशों में जाकर भविष्य तलाश रहे हैं।
लंबे समय तक पूर्ववर्ती सरकारों की उपेक्षा का शिकार रहे इस क्षेत्र की बड़ी आबादी मजदूरी पर निर्भर है। रोजगार के अवसरों की कमी और बहुत जल्दी बहुत अधिक कमाई करने की सोच से भी युवा सपनों को साकार करने के लिए खाड़ी देखों का रुख करते हैं और वहां जाकर बधुआ मजदूर बनने जैसी त्रासद स्थिति से गुजरने के लिए मजबूर होते हैं।
विदेश में रोजगार के नाम पर युवाओं के साथ धोखाधड़ी गंभीर चिंता का विषय है। युवाओं को किसी भी एजेंट के झांसे में आने से पहले उसकी वैधता और विदेश में रोजगार की शर्तों की पूरी जानकारी कर लेनी चाहिए। विदेश मंत्रालय के ई-माइग्रेट पोर्टल पर पंजीकृत एजेंटों और रोजगार से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। युवाओं को इसी माध्यम से विदेश जाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। अपंजीकृत एजेंटों की शिकायत मिलने पर संबंधित विभागों के समन्वय से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
-इंद्र विक्रम सिंह, मंडलायुक्त, गोरखपुर मंडल ।
विदेश भेजने के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। ऐसी शिकायतों पर मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। कस्बों और प्रमुख चौराहों पर कार्यालय खोलकर विदेश भेजने का लालच देने वाले एजेंटों की का सत्यापन कराया जाएगा। इसके लिए गोरखपुर के साथ ही देवरिया, कुशीनगर व महराजगंज जिले के पुलिस कप्तान को निर्देश दिए गए हैं।
