गोरखपुर नगर निगम का 1878 करोड़ रुपये आय का अब तक का सबसे बड़ा बजट पास, विकास को लगेंगे पंख
गोरखपुर नगर निगम ने 1878 करोड़ रुपये के अब तक के सबसे बड़े बजट को मंजूरी दी। बैठक में पार्षदों ...और पढ़ें

गोरखपुर नगर निगम। जागरण
HighLights
नगर निगम ने 1878 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट मंजूर किया।
पार्षदों को विकास कार्यों हेतु 70 लाख रुपये की निधि मिलेगी।
स्वच्छ सर्वेक्षण में प्रथम आने पर 30 लाख अतिरिक्त मिलेंगे।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नगर निगम के 1878 करोड़ रुपये आय के अब तक के सबसे बड़े बजट को बोर्ड ने मंजूरी दी। इसके अलावा महापौर डा. मंगलेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में नगर निगम बोर्ड की बैठक में इस बार कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। अब प्रत्येक पार्षद अपनी निधि से अपने-अपने वार्ड में विकास कार्यों के लिए 70-70 लाख रुपये खर्च कर सकेंगे।
साथ ही अगर स्वच्छ सर्वेक्षण में गोरखपुर नगर निगम देश में पहला स्थान प्राप्त करता है तो सभी पार्षदों को अपने-अपने वार्डों में विकास कार्य कराने के लिए 30-30 लाख रुपये अतिरिक्त उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, बोर्ड बैठक में फिर से जीडीए के बजाए नगर निगम के द्वारा नक्शा पास करने और पार्षदों को मानदेय दिए जाने का मामला उठा। बैठक में पहुंचे ग्रामीण विधायक विपिन सिंह ने विधानसभा में मामला उठाने का आश्वासन दिया।
गुरुवार को नगर निगम सदन में बोर्ड की बैठक आयोजित की गई। सर्वसम्मति से नगर निगम के 187807.45 करोड़ रुपये आय और 126820.50 व्यय के बजट को मंजूरी दे दी गई। बैठक में ग्रामीण विधायक विपिन सिंह भी शामिल हुए। पार्षदों ने शहर में बनने वाले भवनों के नक्शे की स्वीकृति का अधिकार नगर निगम को दिए जाने की मांग उठाई।
वर्तमान में यह कार्य गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के माध्यम से होता है। पार्षदों का तर्क था कि जब नगर निगम क्षेत्र का विस्तार हो चुका है और विकास कार्यों की जिम्मेदारी निगम के पास है, तो नक्शा पास करने की प्रक्रिया भी नगर निगम के माध्यम से होनी चाहिए।
इसके अलावा पार्षदों के मासिक भत्ते को तय करने और उसमें बढ़ोतरी की मांग भी उठी। महापौर और नगर आयुक्त ने कहा कि ग्रामीण विधायक ने दोनों मुद्दों को विधानसभा में रखने का आश्वासन दिया है। इससे पार्षदों को उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में इस दिशा में ठोस निर्णय हो सकता है।
यह भी पढ़ें- गोरखपुर में लागत के आधार पर तय होगी फ्लैटेड फैक्ट्री में फ्लैट आवंटन की दर, अब अंतिम चरण में परियोजना
पार्षद निधि एक करोड़ करने की मांग, महापौर साधे रहे मौन
बैठक के दौरान कई पार्षदों ने पार्षद निधि को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये करने की मांग रखी। उनका कहना था कि बढ़ती आबादी और वार्डों के विस्तार को देखते हुए 70 लाख रुपये भी पर्याप्त नहीं हैं। ग्रामीण विधायक से अनुरोध किया गया कि वे इस संबंध में महापौर और नगर आयुक्त के समक्ष सकारात्मक पहल करें।
हालांकि विधायक ने सत्ता पक्ष के पार्षदों को नसीहत देते हुए कहा कि ऐसी मांग सामान्यतः विपक्ष की ओर से आनी चाहिए और सत्ता पक्ष को उसका समर्थन करना चाहिए, लेकिन यहां स्थिति उलट दिखाई दे रही है। इस पर समाजवादी पार्टी के पार्षद शहाब अंसारी ने विधायक से पुनः अनुरोध किया, मगर इस मुद्दे पर तत्काल कोई सहमति नहीं बन सकी।
हालांकि नगर आयुक्त ने बाद में पार्षद निधि को 60 लाख से बढ़कर 70 लाख रुपये करने की घोषणा की। साथ में यह भी कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर वन आने पर सभी पार्षदों को वार्ड के विकास के मद में 30-30 लाख रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। हालांकि पूरे मामले में महापौर खामोश बने रहे उन्होंने कहा कि अगर मैं बोलूंगा तो मना उल्टा पड़ जाएगा।
‘समाजवादी पार्टी के माफिया’ शब्द पर बैठक में हंगामा
बैठक के दौरान एक समय माहौल गरमा गया। धर्मशाला वार्ड के पार्षद छठी लाल गुप्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि सपा से जुड़े माफिया द्वारा काफी समय से नगर निगम की भूमि पर कब्जा है और निगम प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है। इसके संबंध में कई बार ज्ञापन दिया गया है। इस पर समाजवादी पार्टी के पार्षदों ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि किसी राजनीतिक दल का नाम लेकर आरोप लगाना उचित नहीं है।
काफी देर तक बहस चलती रही, लेकिन बाद में महापौर और वरिष्ठ सदस्यों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। बैठक में शिवाजीनगर की पार्षद संगीता सिंह ने रुस्तमपुर ढाले से आजाद चौक होते हुए बड़गो तक नहर की भूमि से अवैध कब्जा कर जाम की समस्या से निजात की मांग की।
दिग्विजय नगर वार्ड के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने आइजीआरएस में फर्जी शिकायत पर रोक लगाने की मांग उठाई। मदन मोहन मालवीय नगर वार्ड के पार्षद राजा यादव ने रानीडीहा चौराहा पर सुलभ शौचालय बनाने समेत विभिन्न मांग उठाई।
-1772157463488.png)
AI Generated image
-1772157536000.png)
AI Generated image
आगरा नगर निगम ने बड़ा हो गया गोरखपुर का बजट
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि बजट का आकार बहुत बड़ा हो गया है। पहले जहां मात्र 800 करोड़ का बजट होता था, अब वह बढ़कर 1800 करोड़ से भी ज्यादा हो गया है। इसका आकार अब आगरा नगर निगम से भी काफी ज्यादा हो गया है। इससे यह साबित होता है कि गोरखपुर नगर निगम लगातार विकास कार्य कर रहा है। शासन से भी काफी सहायता मिल रही है।
ये भी लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
- संपत्ति कर पर 15 प्रतिशत तक की छूट
एक अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक डिजिटल/आनलाइन भुगतान करने पर करदाताओं को 15 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। अन्य माध्यमों से भुगतान करने पर 10 प्रतिशत की रियायत मिलेगी। इसके बाद एक जुलाई 2026 से 31 अगस्त 2026 तक डिजिटल/आनलाइन भुगतान पर 12 प्रतिशत और अन्य माध्यम से भुगतान करने पर आठ प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
- नगर निगम निर्धारण सूची में संशोधन और परिवर्तन उपविधि-2025 को स्वीकृति। इससे कर निर्धारण प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
- वार्ड नंबर 34 विश्वकर्मापुरम-बौलिया के पार्षद मनोज त्रिपाठी के दो कर्मचारियों पर वसूली के आरोप की होगी जांच।
- बंधू सिंह मल्टीलेवल पार्किंग में पुराने दुकानदारों को प्राथमिकता के आधार पर दुकानें होंगी आवंटित।
- बेतियाहाता मलिन बस्ती में अत्याधुनिक शौचालय बनेगा।
