Gorakhpur Weather Today: गोरखपुर में ठहर कर बरसते रहेंगे बादल, गर्मी पर रहेगा नियंत्रण
गोरखपुर और आसपास के जिलों में मानसून अभी सक्रिय है, अगले एक सप्ताह तक बादलों की आवाजाही और वर्षा का ...और पढ़ें

अचानक आई तेज वर्षा का आनंंद लेते साईकिल पर सवार छात्र। पंकज श्रीवास्तव
HighLights
गोरखपुर में अगले एक सप्ताह तक वर्षा का सिलसिला जारी रहेगा।
14 से 17 सितंबर के बीच भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।
अलनीनो के कारण सितंबर की कुल वर्षा पर संशय बना हुआ है।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मानसून ने अभी गोरखपुर और आसपास के जिलों से मुंह नहीं मोड़ा है। आसमान में बादलों की आवाजाही और वर्षा का सिलसिला निरंतर बना हुआ है। कहीं फुहारें पड़ने तो कहीं झमाझम वर्षा होने से लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है। मौसम विज्ञानी कैलाश पांडेय अगले एक सप्ताह तक मौसम का यही मिजाज बने रहने की संभावना जता रहे हैं। उनके अनुसार बादल बरसते रहेंगे और तापमान पर भी नियंत्रण बना रहेगा।
मौसम विज्ञानी के अनुसार मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश में निम्न वायुदाब क्षेत्र बना हुआ है। इसी के प्रभाव से वातावरण में बादल टिके हैं और रुक-रुककर वर्षा हो रही है। इस बीच ओडिशा से सटे बंगाल की खाड़ी में एक और निम्न वायुदाब क्षेत्र तैयार हो रहा है। इसके मजबूत होने पर यह झारखंड होते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा।
इसका असर 14 सितंबर से गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में दिखाई देने की संभावना है। 15, 16 और 17 सितंबर को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम, जबकि कुछ जगहों पर मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है।
वर्षा के इस दौर से तापमान में भी गिरावट आएगी। अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री से नीचे जाने की उम्मीद है। वातावरण में आर्द्रता अधिक रहने के कारण दर्ज तापमान की तुलना में गर्मी का अहसास और कम रहेगा।
महीने की वर्षा का आधा कोटा पूरा, बाकी पर संशय
मौसम विज्ञानी ने बताया कि सितंबर में सामान्य वर्षा का मानक 220 मिलीमीटर है। इसके मुकाबले पहले 11 दिनों में ही करीब 100 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है। यानी महीने की औसत वर्षा का लगभग आधा हिस्सा पूरा हो चुका है। इसके बावजूद अगले 20 दिनों में पूरा औसत आंकड़ा पार होगा या नहीं, इसे लेकर मौसम विज्ञानी को संशय है।
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वह बता रहे हैं कि वर्षा वाले दिनों की संख्या तो औसत से ज्यादा रहेगी लेकिन वर्षा मानक के अनुरूप पर शायद ही होगी। इसका कारण अलनीनो की स्थिति है। देश के दक्षिणी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से दोगुने से अधिक बना हुआ है। यह स्थिति मानसून की सक्रियता में बाधा डाल सकती है। ऐसे में बादल बनने के बावजूद उनके पूरी तरह वर्षा में तब्दील नहीं होने की आशंका बनी रहेगी।
