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गोरखपुर में रिटायर्ड डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 1.58 करोड़ की ठगी में एक गिरफ्तार, कई दिनों से चल रही थी तलाश

Published: Thu, 12 Mar 2026 08:00 AM (IST)

गोरखपुर में एक सेवानिवृत्त डॉक्टर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.58 करोड़ रुपये की ठगी हुई। पुलिस ने वाराणसी ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. रिटायर्ड डॉक्टर से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी।

  2. 1.58 करोड़ रुपये का साइबर फ्रॉड, एक गिरफ्तार।

  3. मथुरा के संगठित गिरोह ने की थी यह ठगी।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रिटायर्ड डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 1.58 करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में साइबर थाना पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया विकास विश्वकर्मा वाराणसी के चितईपुर स्थित गणेशपुरी कालोनी का रहने वाला है।

जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम में से 80 लाख रुपये उसके खाते में ट्रांसफर हुए थे। पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले के पीछे मथुरा का एक संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है,अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।

कैंट क्षेत्र के नहर रोड निवासी 64 वर्षीय सेवानिवृत्त आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डाॅ. मंजुला श्रीवास्तव को जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट कर ठगी का शिकार बनाया था। वर्ष 2018 में सेवा से सेवानिवृत्त हुईं डॉ. मंजुला अपने घर में अकेली रहती हैं। 13 फरवरी 2026 को उनके वाट्सएप पर एक अज्ञात व्यक्ति का वीडियो काल आया जिसने खुद को एटीएस, एनआइए और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका नाम मनी लान्ड्रिंग मामले में आया है।

ठग ने एक एटीएम कार्ड दिखाते हुए दावा किया कि उनके केनरा बैंक खाते से 50 लाख रुपये ट्रांसफर हुए हैं और इसकी जांच चल रही है। इसके बाद जालसाजों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखकर डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा। उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि किसी को जानकारी दी तो उन्हें एक साल तक जेल भेज दिया जाएगा।

डर और मानसिक दबाव का फायदा उठाकर जालसाजों ने 13 फरवरी से 21 फरवरी के बीच डाॅ. मंजुला की सभी फिक्स्ड डिपाजिट तुड़वाकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। ठगों ने यह भी भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद यह रकम वापस कर दी जाएगी।

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24 फरवरी को जालसाजों ने उन्हें बताया कि यूनियन बैंक का पैसा उनके खाते में आ जाएगा, लेकिन रकम नहीं आई। जब उन्होंने सवाल उठाया तो जालसाजों ने कहा कि “आप जैसे 247 लोग हैं।” इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने परिजनों को सूचना दी। 25 फरवरी को साइबर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।

बैंक खातों और लेनदेन की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा वाराणसी निवासी विकास विश्वकर्मा के खाते में गया है। पुलिस ने बुधवार को उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में विकास ने दावा किया कि वह लखनऊ में काम करता है और उसे खाते में 80 लाख रुपये ट्रांसफर होने की जानकारी नहीं थी। हालांकि पुलिस को संदेह है कि उसका खाता साइबर गिरोह द्वारा इस्तेमाल किया गया।

एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल का कहना है कि बैंक ट्रांजेक्शन, काल डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को चिन्हित किया जा रहा है, जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।