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हरियाणा से पूर्वांचल तक हथियारों का खतरनाक नेटवर्क, बिश्नोई गैंग के 5 गुर्गे गिरफ्तार; 30000 में बेची जा रही थीं पिस्टल

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:25 PM (IST)

एसटीएफ गोरखपुर और क्राइम ब्रांच ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से अवैध हथियार बरामद हुए हैं।

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HighLights

  1. लॉरेंस बिश्नोई गैंग के हथियार नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

  2. एसटीएफ गोरखपुर और क्राइम ब्रांच ने पांच सदस्य पकड़े।

  3. अवैध पिस्टल मध्य प्रदेश, हरियाणा से पूर्वांचल में बिकती थीं।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। एसटीएफ की गोरखपुर यूनिट व क्राइम ब्रांच टीम ने जिले में सक्रिय लारेंस बिश्नोई गैंग के असलहा नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चार .32 बोर पिस्टल, चार मैगजीन, एक .32 बोर रिवाल्वर और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपितों के लारेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों के संपर्क में होने और उनसे पिस्टल खरीदकर पूर्वांचल में सप्लाई करने की जानकारी सामने आई है।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बिहार के गोपालगंज स्थित विजयीपुर के बड़हरा जगदीशपुर निवासी हाल मुकाम हड़हवा फाटक श्रेयांश यादव उर्फ बबलू,देवरिया कोतवाली के वार्ड नंबर पांच काली मंदिर निवासी अजीत यादव,गोरखनाथ के धर्मशाला बाजार निवासी अभिषेक गौड़ उर्फ भेली,जटेपुर दक्षिणी निवासी राहुल गुप्ता व तिवारीपुर के माधोपुर निवासी अभिषेक प्रजापति उर्फ अभी के रूप में हुई है।

एसटीएफ और क्राइम ब्रांच टीम ने सोमवार रात करीब 10:20 बजे पैडलेगंज से मोहद्दीपुर चौराहे की ओर जाने वाली सड़क पर विंध्यवासिनी पार्क के गेट के पास से सभी को पकड़ा। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपितों ने मध्य प्रदेश के बड़वानी और हरियाणा के सोनीपत से अवैध पिस्टल खरीदकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बेचने की बात बताई है।

डेढ़ लाख में खरीदी थी पिस्टल 

सूत्रों के अनुसार एक पिस्टल 30 से 40 हजार रुपये में बेची जाती थी। पिछले तीन वर्षों में गोरखपुर और आसपास के जिलों में 100 से 150 पिस्टल बेचने की जानकारी सामने आई है। हालांकि पुलिस अब इस दावे की पुष्टि के लिए आरोपितों के मोबाइल और लेनदेन का ब्योरा खंगाल रही है। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि खजनी क्षेत्र के निवासी पीएसी के जवान सूरज यादव व उसके साथी प्रमोद ने हत्या कराने के लिए इसी गिरोह से डेढ़ लाख रुपये में पिस्टल खरीदी थी।

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एसटीएफ का दावा है कि सिंघड़िया में किराए के कमरे में पर रहने वाले बिहार निवासी शशांक पांडेय ने आरोपितों को लारेंस बिश्नोई गैंग से जोड़ा था। इसके बाद हथियारों की खरीद और सप्लाई का नेटवर्क आगे बढ़ा। एसटीएफ शशांक के साथ ही 10 अन्य लोगों की तलाश कर रही है। जांच में उत्तर प्रदेश के साथ हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक नेटवर्क फैले होने की बात सामने आई है।

अब पुलिस हथियारों के स्रोत से लेकर खरीदारों तक पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। सीओ कैंट कीर्तिनिधि आनंद ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों के संपर्क में रहने वाले लोगों, उनके बैंक लेनदेन और मोबाइल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

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यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से कितने हथियार पूर्वांचल में पहुंचे और इनमें से कितने का इस्तेमाल आपराधिक वारदातों में हुआ है।