बारिश के बाद गोरखपुर में घूमने का बना रहे हैं प्लान, तो इन जगहों पर बदल जाएगा नजारा
गोरखपुर में बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया है, ऐसे में रामगढ़ ताल, गोरखनाथ मंदिर, रेल म्यूजियम, गीता प्रेस ...और पढ़ें

HighLights
रामगढ़ ताल: बारिश के बाद हरियाली और बादलों से घिरा अद्भुत नजारा।
गोरखनाथ मंदिर: बारिश में भी शांत और आकर्षक, लाइट एंड साउंड शो।
रेल म्यूजियम: रेलवे के विकास की गाथा, ऐतिहासिक प्रदर्शनी का अनुभव।
विवेक शुक्ला, गोरखपुर। गोरखपुर में शिनवार को हुए बारिश ने पूरे शहर को मुश्किल में डाल दिया था। वहीं रविवार को हल्की धूप व बारिश ने शहर के मौसम को सुहाना कर दिया है। लगातार बारिश के बाद तापमान में गिरावट के साथ वातावरण में नमी बढ़ गई है। ऐसे में अगर आप घर से निकलकर गोरखपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो सामान्य दिनों के मुकाबले बारिश के बाद शहर की कुछ जगहों का नजारा खास हो जाता है। हालांकि मौसम विभाग ने रविवार को भी गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवा की संभावना जताई है, इसलिए खुले स्थानों पर मौसम देखकर ही निकलना बेहतर होगा।

रामगढ़ ताल
गोरखपुर के लिए प्रकृति का अनुपम उपहार यह ताल कभी मछुआरों की आजीविका का आधार रहा पर आज यह पर्यावरणीय जागरूकता का प्रतीक बन चुका है। पर्यटन की दृष्टि से तो यह हब सा बन गया है। समय के साथ इसका स्वरूप तो बदला, लेकिन महत्व कभी कम नहीं हुआ बल्कि बढ़ा ही। लोककथाओं, महाभारतकालीन इतिहास, भूगोल और आधुनिक विज्ञान सब अपने-अपने तरीके से इस ताल की उत्पत्ति को व्याख्यायित करते हैं। उसकी गौरवशाली ऐतिहासिकता पर मुहर लगाते हैं। बारिश के बाद रामगढ़ ताल के आसपास हरियाली और बादलों से घिरा आसमान अलग ही नजारा देता है। परिवार या दोस्तों के साथ शाम बिताने के लिए यह शहर के प्रमुख विकल्पों में है।

गोरखनाथ मंदिर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कारण गोरखपुर का गोरखनाथ मंदिर इस समय पूरे देश में चर्चित है लेकिन इस मंदिर का अस्तित्व त्रेता युग से है। अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब द्वारा इस मंदिर को नष्ट करने की कोशिश की गई लेकिन इस मंदिर का महत्व हमेशा कायम रहा। मंकर संक्रांति पर इस मंदिर परिसर में लगने वाला खिचड़ी मेला में देश भर से श्रद्धालु यहां आकर बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाते हैं। गोरखपुर रेलवे स्टेशन से इस मंदिर की दूरी मात्र तीन किलोमीटर है। अगर बारिश बीच-बीच में होती रहे तो गोरखनाथ मंदिर जाना बेहतर विकल्प हो सकता है। मंदिर परिसर में समय बिताने के साथ शाम का लाइट एंड साउंड शो भी आकर्षण है।

रेल म्यूजियम
शहर के बीच स्थापित रेल म्यूजियम में प्रवेश करते ही रेलवे के विकास की गाथा मानस पटल पर अंकित हो जाती है। रेल म्यूजियम में रखे गए पुराने इंजन, उपकरण, मॉडल और अभिलेख रेलवे के प्रगति यात्रा की कहानी कह रहे हैं। यह म्यूजियम न सिर्फ शहर बल्कि पूर्वांचल और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शहर और आसपास ही नहीं दूर-दराज स्थित स्कूलों के छात्र अपने शिक्षकों के साथ म्यूजियम पहुंचते हैं। वे अपना ज्ञान तो बढ़ाते ही हैं, खूब मौजमस्ती भी करते हैं। लगातार बारिश होने लगे तो खुले स्थानों की बजाय रेल म्यूजियम का रुख किया जा सकता है। यहां रेलवे से जुड़ी ऐतिहासिक चीजें और प्रदर्शनी देखने को मिलती हैं। यह गोरखपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।

गीता प्रेस
सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथों का सबसे बड़ा प्रकाशक गीता प्रेस दुनिया भर में शुद्ध और सस्ते साहित्य के लिए जाना जाता है। वर्ष 1923 में स्थापित इस संस्थान ने अब तक श्रीमद्भगवद्गीता और श्रीरामचरितमानस सहित 40 करोड़ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। बिना किसी व्यावसायिक विज्ञापन और दान के चलने वाले इस संस्थान को भारत सरकार द्वारा गांधी शांति पुरस्कार (2021) से भी सम्मानित किया जा चुका है। बारिश के मौसम में गीता प्रेस भी घूमने का विकल्प है। यहां धार्मिक पुस्तकों के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ी चीजें देखने को मिलती हैं।

कुसम्ही जंगल
गोरखपु शहर से सटे कुसम्ही जंगल को पूर्वांचल का मुख्य प्राकृतिक आकर्षण और प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट माना जाता है। साल के घने वृक्षों से घिरा यह जंगल पौराणिक बुढ़िया माई मंदिर और विनोद वन मिनी जू के लिए जाना जाता है। लगभग आठ हजार एकड़ में फैले इस वन क्षेत्र को राज्य सरकार द्वारा आधुनिक ईको-टूरिज्म सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। पूर्वांचल की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक छटा को करीब से महसूस करने के लिए दूर-दूर से पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं। बारिश के बाद कुसम्ही जंगल की हरियाली आकर्षित करती है, लेकिन तेज बारिश, आंधी या गरज-चमक के दौरान यहां जाने से बचना चाहिए। मौसम साफ होने पर ही इस तरफ घूमने का प्लान बनाएं।
