गोरखपुर में गुरु गोरक्षनाथ और रामघाट के सभी जर्जर गजीबो गिराए जाएंगे, नए निर्माण की तैयारी
महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट और रामघाट के जर्जर गजीबो को गिराने की योजना शुरू हो गई है, जिसके तहत बचे ...और पढ़ें

महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट के भी सभी गजीबो हैं जर्जर। जागरण
HighLights
गुरु गोरक्षनाथ और रामघाट के सभी जर्जर गजीबो गिराने का निर्णय।
एक गजीबो गिरने से दो वकीलों की दुखद मृत्यु हुई।
कंक्रीट से नए, डिजाइनदार बैठने के स्थान बनाए जाएंगे।
दुर्गेश त्रिपाठी, गोरखपुर। महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट के साथ ही राप्ती नदी के दूसरे तट पर स्थित रामघाट के भी गजीबो भी जर्जर हो चुके हैं। सभी गजीबो को गिराकर कंक्रीट की सहायता से बैठने के लिए डिजाइनदार निर्माण कराने की योजना पर काम शुरू हो गया है। यानी महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट के बचे छह और रामघाट के सभी तीनों गजीबो जल्द ही गिराए जाएंगे।
पहले इन गजीबो को संरक्षित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इनकी स्थिति देखकर निर्णय बदला गया है। घाट के मुख्य द्वार पर स्थापित गेट को भी पहले ही गिराने का निर्णय लिया जा चुका है। सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता विकास कुमार सिंह ने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर प्रक्रिया की जा रही है।
छह सितंबर की सुबह तकरीबन 11:30 बजे राप्ती नदी के तट पर स्थित महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट के एक गजीबो की छत (गुंबद) गिरने से दो वकीलों आलोक अस्थाना और संजय सिंह की मृत्यु हो गई थी। शासन ने मामले का संज्ञान लिया तो तत्काल जांच शुरू कराई गई।
इसके बाद घाट के बचे गजीबो को जर्जर मानते हुए चारों तरफ बैरिकेडिंग करा दी गई। तब से आइआइटी के विशेषज्ञों के आने का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की सलाह पर मुख्य द्वार का निर्माण शुरू करा दिया गया है।
जिसको मिला ठेका, उसके पास अनुभव न होने का आरोप
सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि विभाग के पास घाट की सीढ़ियां बनाने तक का ठेका तो सही था, लेकिन घाट के सुंदरीकरण का काम मिलने पर सभी ने हैरानी जताई थी। वर्ष 2019 में जिस फर्म को काम मिला उसके पास इसका कोई अनुभव नहीं था। इसके बाद भी तत्कालीन अभियंताओं ने आंख बंद रखी।
पत्थरों को आपस में चिपकाया गया
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों घाटों के सुंदरीकरण कार्य में इतनी तेजी दिखाई गई थी कि पत्थरों को सही से व्यवस्थित भी नहीं किया गया। सभी पत्थरों को आपस में चिपकाया गया है। समय के साथ यह पत्थर अपने आप गिर रहे हैं। महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट पर गजीबो में एक-दूसरे से चिपकाए गए पत्थरों का कुछ न कुछ हिस्सा आए दिन टूटकर गिरता रहता है।
15 दिन बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं
महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट पर गजीबो गिरने की घटना के 15 दिन बाद भी अब तक जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है। गजीबो गिरने के कारणों का भी अब तक पता नहीं किया जा सका है। कमेटी की रिपोर्ट का सभी को इंतजार है।
सिंचाई विभाग ने ये काम कराए
- राप्ती नदी के बाएं तट पर महायोगी गुरु गोरक्षनाथ घाट का निर्माण - 2785.71 लाख
- राप्ती नदी के बाएं तट पर राज घाट का निर्माण - 499 लाख
- राप्ती नदी के दाएं तट पर रामघाट का निर्माण - 1599.00 लाख
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