गोरखपुर, जेएनएन। रसोई गैस के लिए बेहाल उपभोक्ताओं के साथ कदम-कदम पर खेल भी किया जा रहा है। हाल के दिनों में सिलेंडर की मांग बढ़ने लगी तो सिलेंडर ब्लैक करना शुरू कर दिया गया। हाकर सिलेंडर की डिलीवरी दिखा दे रहे हैं। इससे उपभोक्ता के खाते में सब्सिडी के रुपये तो आ जा रहे हैं, लेकिन सिलेंडर नहीं मिल रहा है।
उपभोक्ताओं का दर्द
जंगल तुलसीराम बिछिया निवासी किशन कुमार का इंडियन आयल का कनेक्शन है। किशन ने 10 फरवरी को गैस बुक किया। 28 फरवरी को गैस डिलीवरी का मैसेज आ गया, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। बाद में बिना सिलेंडर मिले सब्सिडी भी आ गई। यानी सिलेंडर किसी और को दे दिया गया, सब्सिडी उपभोक्ता के खाते में आ गई। जबकि बांसगांव के भटवली बाजार स्थित भारत गैस की एजेंसी पर बिंद्रावती देवी ने दो साल पहले कनेक्शन लिया था। कनेक्शन नंबर 8071939 है। जब से कनेक्शन मिला तब से सिलेंडर ही नहीं मिला। पति पन्नेलाल ने बैंक का एकाउंट चेक किया तो पता चला कि सब्सिडी लगातार आ रही है।
यानी बिंद्रावती देवी के नाम से कोई कनेक्शन बुक कर रहा है और सिलेंडर बेच दे रहा है। जनवरी से शुरू हुई गैस सिलेंडरों की कमी जनवरी से रसोई गैस सिलेंडरों की कमी शुरू हुई है। पहले सिर्फ इंडियन आयल में समस्या थी, लेकिन अब भारत पेट्रोलियम की एजेंसियों पर भी रसोई गैस का संकट बढ़ने लगा है। एक महीने पहले बुक किए गए सिलेंडर की डिलीवरी अब तक नहीं हो पा रही है। ब्लैक में कोई समस्या नहीं एक तरफ बुक करने वालों को सिलेंडर नहीं मिल रहा है तो दूसरी तरफ ब्लैक मार्केट में सिलेंडर एक हजार से 12 सौ रुपये तक में आसानी से मिल जा रहा है।
ब्लैक मार्केट में सिलेंडर की कमी का कोई असर नहीं पड़ रहा है। पिछले दिनों प्रशासन ने आटो में रसोई गैस रिफिल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन फिर यह धंधा शुरू हो गया है। चीफ एरिया मैनेजर रमेश कुमार का कहना है कि सब्सिडी मिलने और सिलेंडर न मिलने का मामला संज्ञान में आया है। किन कारणों से ऐसा हो रहा है इसकी जांच कराई जा रही है।