गोरखपुर, जेएनएन। सरकार व विभाग के दावे के बीच कुशीनगर के किसान एक बार फिर बकाए गन्ना मूल्य भुगतान के पेंच में फंसते दिख रहे हैं। दावा किया गया था कि मिल को गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के बाद भुगतान कर दिया जाएगा। सरकार का यह दावा जमीन पर उतरता नहीं दिख रहा है। कप्तानगंज चीनी मिल ने तो अभी पिछले सत्र के बकाया भुगतान नहीं किया है, वर्तमान पेराई सत्र की तो बात ही दूर है। नवंबर 2018 में चालू हुई मिलों ने अब तक 139.17 लाख ¨क्वटल की पेराई की है, जिसका मूल्य 34288.12 लाख रुपये हुआ। इसके सापेक्ष 464.00 लाख रुपये का ही भुगतान हो सका है, 15021 लाख रुपये बकाया है।

गन्ने की पेराई व भुगतान की स्थिति

खड्डा-9.47 लाख ¨क्वटल-मूल्य 2292.48 रुपये, भुगतान- 724.58 लाख रुपये

रामकोला-35.18 लाख ¨क्वटल-मूल्य 9064.89 रुपये, भुगतान - 5951.18 लाख रुपये

कप्तानगंज-21.27 लाख ¨क्वटल-मूल्य 5042.67 रुपये, भुगतान- शून्य

सेवरही-30.50 लाख ¨क्वटल-मूल्य 7476.15 रुपये, भुगतान- 3228.10 लाख रुपये

ढाढा-42.70 लाख ¨क्वटल-मूल्य 10412.76 रुपये, भुगतान- 9560.17 लाख रुपये

बंद हो चुकी पांच चीनी मिलों पर किसानों का अभी कारोड़ों बकाया

बंद हो चुकी कुशीनगर जिले की पडरौना, लक्ष्मीगंज, छितौनी, रामकोला खेतान, कठकुइयां किसानों का करोड़ों रुपये पहले से ही बकाया है। दो दशक बीत गए लेकिन भुगतान न हो सका है।

भुगतान को लेकर विभाग संजीदा : डीसीओ

जिला गन्ना अधिकारी वेद प्रकाश ¨सह ने कहा सभी मिलों को भुगतान निर्धारित समय सीमा में करने का निर्देश दिया गया है। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कप्तानगंज चीनी मिल पुराने बकाए का भुगतान कर रही है। इसलिए इस वित्तीय वर्ष का भुगतान किसानों को नहीं मिला है।

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