गोरखपुर, जेएनएन। पूर्वोत्तर रेलवे के लूप (साइड वाली रेल लाइनें) लाइनों पर भी इलेक्ट्रिक इंजनों से ट्रेनें दौड़ेंगी। मुख्य मार्ग बाराबंकी-गोरखपुर-छपरा, गोरखपुर-भटनी-वाराणसी, गोरखपुर-कप्तानगंज-नरकिटयागंज और छपरा-बलिया-वाराणसी रेलमार्ग पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने के बाद रेलवे प्रशासन ने लूप लाइनों का भी विद्युतीकरण शुरू कर दिया है।

गोरखपुर-आनंदनगर-नौतनवा और आनंदनगर-बढ़नी-गोंडा कुल 261 किलोमीटर रेल लाइन पर विद्युतीकरण तेजी के साथ शुरू है। गोरखपुर-आनंदनगर-नौतनवां का विद्युतीकरण 31 मार्च तक तथा आनंदनगर-बढ़नी-गोंडा रेलमार्ग का विद्युतीकरण 31 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। फरवरी में गोरखपुर-नकहा जंगल तक इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलने लगेंगी।

प्रथम चरण में गोरखपुर-आनंदनगर-नौतनवां रेलमार्ग पर फाउंडेशन के बाद खंभे लगने शुरू हो गए हैं। इस मार्ग पर गोरखपुर-नकहा जंगल तक का विद्युतीकरण तो जनवरी में ही पूरा कर लिया जाएगा। गोरखपुर-नौतनवां का कार्य पूरा हो जाने के बाद द्वितीय चरण में आनंदनगर-बढ़नी-गोंडा रूट पर कार्य में तेजी आएगी। हालांकि, इस मार्ग पर भी सर्वे के बाद फाउंडेशन का कार्य शुरू हो गया है। दरअसल, रेलवे बोर्ड ने पूर्वोत्तर रेलवे की सभी रेल लाइनों के विद्युतीकरण की संस्तुति प्रदान कर दी है।

कोरोना काल में भी 282 किमी मार्ग का विद्युतीकरण पूरा

कोरोना काल में भी विद्युतीकरण कार्य तेजी के साथ चलता रहा। भटनी-औंड़िहार सहित 282 किमी रेलमार्ग पर इलेक्ट्रिक इंजनों से ट्रेनें चलने लगी हैं। मार्च 2020 से पहले 1967 किमी रेल लाइन का विद्युतीकरण पूरा हो गया था। जानकारों के अनुसार वर्ष 2016-17 में 159.20 किमी, 2017-18 में 167.14 किमी तथा 2018-19 में 431.23 किमी रेल खण्ड का विद्युतीकरण कार्य पूरा हुआ। अभी तक 2250 किमी रेललाइन का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। करीब 3100 रुट किमी रेल लाइन है।

गोरखपुर के एसी शेड में शुरू है इलेक्ट्रिक इंजनों की मरम्मत

गोरखपुर में सौ लोको क्षमता वाला एसी शेड में इलेक्ट्रिक इंजनों की मरम्मत शुरू है। पूर्वोत्तर रेलवे रूट पर चलने वाले इलेक्ट्रिक इंजनों को मरम्मत और रखरखाव आदि के लिए दूसरे जोन में नहीं भेजना पड़ रहा है। इस शेड में मरम्मत होने वाले इलेक्ट्रिक इंजनों पर गोरखपुर का नाम अंकित हो रहा है। वर्ष 2007-08 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने पूर्वोत्तर रेलवे में इलेक्ट्रिफिकेशन और इलेक्ट्रिक शेड की घोषणा की थी।

नई रेललाइन के साथ ही बिछने लगेंगे बिजली के तार

अब नई रेल लाइनों के साथ बिजली के तार भी बिछने लगेंगे। यानी, नई रेल लाइनों पर भी ट्रेनें इलेक्ट्रिक इंजनों से ही चलनी शुरू होंगी। नए रेलमार्ग खलीलाबाद- मेहदावल-बांसी-डुमरियागंज-उतरौला-बलराम-श्रावस्ती-भिंगा-बहराइच लगभग 240 किमी के विद्युतीकरण की भी स्वीकृति मिल गई है। करीब 270 करोड़ रुपये बजट भी आवंटित है। सहजनवां-दोहरीघाट 80 किमी और आमान परिवर्तित मार्ग इंदारा-दोहरीघाट 35 किमी के विद्युतीकरण भी स्वीकृति मिल चुकी है। इन दोनों रेलमार्गों के लिए करीब 125 करोड़ का बजट प्रस्तावित है।

इन लूप लाइनों पर पूरा हो गया है विद्युतीकरण

औंड़िहार-तरावं-नंदगंज, सीतापुर-लखीमपुर, डालीगंज-सीतापुर, गोंडा-सुभागपुर, कछवारोड से माधोसिंह, बरेली सिटी से कासगंज, मनकापुर-कटरा-अयोध्या, जलालपुर-थावे, थावे-राजपट्टी, मेंडू-कासंगंज-दरियावगंज-फर्रुखाबाद, कन्नौज से कल्याणपुर।

विद्युतीकरण के फायदे

रेलवे के खर्चों में आएगी कमी।

समय की बचत होगी, ट्रेनें बढ़ेंगी।

स्टेशनों पर बिजली की व्यवस्था।

तेल से संभावित दुर्घटनाएं खत्म।

पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैलेगा।

पूर्वोत्तर रेलवे में तेजी के साथ विद्युतीकरण का कार्य हो रहा है। विद्युतीकरण से जहां डीजल पर हमारी निर्भरता कम होगी और राजस्व की बचत होगी, वहीं पर्यावरण के लिए भी यह लाभकारी होगा। - पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे- गोरखपुर। 

kumbh-mela-2021

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप