गोरखपुर, जागरण संवाददाता। प्रदेश के पांच डाक्टरों की डिग्री पर 22 जिलों में अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित होने के पर्दाफाश के बाद मंडल के डाक्टरों की डिग्री के कई केंद्रों में इस्तेमाल होने का मामला फिर गरम हो गया है। मंडल के नौ डाक्टरों की डिग्री पर कई जगह अल्ट्रासाउंड और पैथोलाजी केंद्र संचालित होते मिले थे। 28 अल्ट्रासाउंड केंद्रों में अपनी डिग्री देने वाले डा. अधीश के नाम पर मेडिकल कालेज रोड पर न्यू लाइफ लाइन के नाम से अल्ट्रासाउंड केंद्र था।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि डा. अधीश ने काफी समय पहले अपनी डिग्री वापस ले ली थी। कुछ महीने पहले स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड और पैथोलाजी केंद्रों का डाटा आनलाइन करना शुरू किया था। तब पता चला कि नौ डाक्टर ऐसे हैं जिनकी डिग्री पर दो से ज्यादा जगहों पर केंद्र संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इन डाक्टरों को नोटिस जारी किया था।

50 डाक्टर संचालित कर रहे दो अल्ट्रासाउंड केंद्र

पीसीपीएनडीटी (प्री कांसेप्शन एंड प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स) के तहत विशेषज्ञ डाक्टर को खुद अल्ट्रासाउंड करना होगा। इस कार्य में कोई सहयोगी भी नहीं रखा जा सकता है। बहुत जरूरी होने पर सहयोगी डाक्टर की बताई बातों को लिख सकता है। जिले में 50 डाक्टरों की डिग्री पर दो अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि विशेष निर्देशों के साथ डाक्टर ऐसा कर सकते हैं। जिले में 254 अल्ट्रासाउंड केंद्र पंजीकृत हैं।

डा. काजल नहीं सामने आईं

तकरीबन डेढ़ साल पहले सहजनवां की एक महिला को बेटा पैदा हुआ था। इसका एक हाथ नहीं था। साथ ही कई अन्य दिक्कतें भी थीं। गर्भावस्था में महिला का अल्ट्रासाउंड हुआ था तो डाक्टरों ने सब कुछ सामान्य होने की रिपोर्ट दी थी। तत्कालीन डीएम के निर्देश पर मामले में चार डाक्टरों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई गई थी। सीएमओ की अध्यक्षता में मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था। सहजनवां में अल्ट्रासाउंड करने वाली डा. काजल को नोटिस जारी किया गया था। दिल्ली निवासी डाक्टर आज तक मेडिकल बोर्ड के सामने नहीं उपस्थित हुईं। बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

Edited By: Pradeep Srivastava