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गोरखपुर, जेएनएन। नगर निगम में तेल के नाम पर हो रहे खेल से पर्दा उठ गया है। औसतन प्रतिदिन एक लाख रुपये की डीजल चोरी हो रही थी। निगम के आंकड़ें खुद इसकी गवाही दे रहे हैं। डीजल फीलिंग को लेकर बदली व्यवस्था से खपत में करीब 30 फीसद तक कमी आई है। अधिकारी डीजल खपत की माहवार समीक्षा कर रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ईधन के खपत को और नियंत्रित किया सकेगा। निगम के मुताबिक लगभग एक करोड़ रुपये प्रतिमाह ईधन पर खर्च होता था जो अब घटकर 70 लाख के आसपास आ गया है। नगर निगम में डीजल चोरी का खेल काफी पुराना है। कई बार डीजल चोरी करते हुए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पकड़े गए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जिन अधिकारियों को निगरानी करनी थी, उन्होंने अपने दायित्व को ईमानदारी से नहीं निभाया, अपितु वह भी उसमें शामिल हो गए। इससे डीजल चोरी का खेल बदस्तूर जारी रहा। आलम यह रहा कि जिन वाहनों में जीपीएस लगा था उनमें भी डीजल की चोरी होती रही। निगम के पार्षदों ने भी कई बार डीजल चोरी पकड़ी। सबूत के साथ अधिकारियों को दिखाया लेकिन, कार्रवाई के नाम पर महज मौखिक चेतावनी दी गई। डीएम के निर्देश के बाद सहम गए डीजल चोर इसकी जानकारी जब जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पाण्डियन को हुई तो उन्होंने इसके लिए एक टीम गठित करते हुए नियमित निगरानी शुरू करने का निर्देश दिया। इसकी काफी चर्चा भी रही। डीजल चोरों को लगा कि यदि पकड़ा गया तो सीधे जेल भेज दिए जाएंगे। जिलाधिकारी के निर्देश पर निगरानी शुरू हुई तो ईधन की खपत कम होती चली गई। प्रतिदिन किस वाहन में कितना ईधन खर्च हुआ इसका डाटा तैयार किया गया। लगातार हो रही समीक्षा इस संबंध में नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि नगर निगम की गाड़ियों में डीजल की खपत को लेकर लगातार निगरानी और समीक्षा की जा रही है। पहले की तुलना में डीजल के मद में खर्च होने वाली धनराशि में करीब 30 फीसद की कमी आई है।

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