गोरखपुर विश्वविद्यालय में अब लंच के बहाने गायब रहना पड़ेगा भारी, उपस्थिति पर सख्ती
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति व लंच के बहाने लंबे समय तक गायब रहने पर ...और पढ़ें

गोरखपुर विश्वविद्यालय। जागरण
HighLights
गोरखपुर विश्वविद्यालय में कार्यालयी समय का कड़ाई से पालन होगा।
सुबह 10 बजे तक उपस्थिति और लंच 30 मिनट का अनिवार्य।
अनुपलब्धता से विश्वविद्यालय के शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे थे।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में कार्यालयी समय के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुपलब्धता पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। विभाग, अनुभाग और कार्यालयों में सुबह 10 बजे तक उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ ही लंच के लिए निर्धारित 30 मिनट से अधिक समय तक कार्यालय से गायब रहने पर रोक लगा दी गई है।
कुलपति प्रो. केपी सिंह के निर्देश पर कुलसचिव धीरेंद्र श्रीवास्तव ने सभी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्यालयी समय का कड़ाई से पालन करने का आदेश जारी किया है।
आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कई अधिकारी और कर्मचारी सुबह 10 बजे तक अपने विभाग, अनुभाग या कार्यालय में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं। यही नहीं, दोपहर में लंच के नाम पर निर्धारित समय से अधिक अवधि तक कार्यालय छोड़ने की स्थिति भी सामने आ रही है।
इसके कारण उच्चाधिकारियों द्वारा बुलाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी अपने कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिलते। प्रशासन ने इसे गैर जिम्मेदार कार्यप्रणाली मानते हुए स्पष्ट किया है कि इससे विश्वविद्यालय के कार्यालयी और शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
नए निर्देश के अनुसार लंच का निर्धारित समय दोपहर दो बजे से 2:30 बजे तक ही रहेगा। इस अवधि के बाद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने विभाग, अनुभाग या कार्यालय में उपस्थित रहना होगा। कार्यालय अवधि के शेष समय में अपनी उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
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आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी अधिकारी-कर्मचारी प्रतिदिन सुबह 10 बजे अपने निर्धारित कार्यस्थल पर उपस्थित होना सुनिश्चित करें। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि समयबद्ध उपस्थिति और कार्यालय में अधिकारियों-कर्मचारियों की उपलब्धता से लंबित कार्यों के निस्तारण के साथ ही उच्चाधिकारियों के स्तर से दिए जाने वाले निर्देशों का भी समय से अनुपालन सुनिश्चित होगा, जो वर्तमान में नहीं हो रहा है।
