गोरखपुर विश्वविद्यालय में रिसर्च-इनोवेशन बढ़ाने पर जोर, कुलपति ने प्रोफेसरों से मांगा प्रस्ताव
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध और नवाचार को बढ़ावा देकर अपनी कार्यसंस्कृति बदलने की तैयारी कर रहा है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय।
HighLights
शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, शोध व नवाचार को प्रोत्साहन।
कार्यसंस्कृति बदलने हेतु सुधार प्रस्ताव आमंत्रित किए गए।
प्रस्तावों पर नवंबर के तीसरे सप्ताह में होगा विचार।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, शोध को प्रोत्साहित करने और नवाचार को बढ़ावा देने की तैयारी है। इसके जरिये विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति बदलने की तैयारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और निदेशकों से ऐसे प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं, जिनसे पढ़ाई, अनुसंधान और प्रशासनिक व्यवस्था में ठोस सुधार हो सके।
इन प्रस्तावों पर नवंबर के तीसरे सप्ताह में प्रस्तावित कार्य परिषद की बैठक में विचार किया जाएगा। कुलपति के निर्देश पर जारी पत्र में सभी संकायों, विभागों और केंद्रों से नवाचारपरक, विकासोन्मुख और परिणामपरक प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। इनमें शैक्षणिक गुणवत्ता के संवर्धन, अनुसंधान को प्रोत्साहन, प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार और वित्तीय नियोजन से जुड़े विषय शामिल किए जा सकते हैं।
विश्वविद्यालय का जोर ऐसे प्रस्तावों पर है, जिनसे संस्थान के समग्र विकास को गति मिले और योजनाओं के परिणाम शैक्षणिक गतिविधियों में दिखाई दें। प्रस्ताव तैयार करते समय उनके विषय और संबंधित समिति के अधिकार क्षेत्र का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त समिति, विद्या परिषद और कार्य परिषद के अधिकार क्षेत्र के अनुसार प्रस्ताव अलग-अलग तैयार किए जाएंगे। इससे संबंधित विषयों पर नियमानुसार विचार और निर्णय की प्रक्रिया सुगम होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए नए विचारों को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाना है। विभागों और केंद्रों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा के बाद उन्हें आगामी बैठकों की कार्यसूची में शामिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इससे विश्वविद्यालय की जरूरतों के अनुरूप नई योजनाओं और सुधारों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
प्रस्ताव देने की अंतिम तिथि 15 नवंबर
प्रस्ताव देने की अंतिम तिथि भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने निर्धारित की है। सभी संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और निदेशकों को कहा गया है कि वे अपने प्रस्ताव 15 नवंबर तक कुलसचिव कार्यालय में उपलब्ध करा दें। इस संबंध में विश्वविद्यालय ने 14 अक्टूबर को पत्र जारी कर दिया है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति केपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने, शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए विचारों को आगे बढ़ाना जरूरी है। सभी संकायों और विभागों से अपेक्षा है कि वे ऐसे व्यावहारिक और परिणामपरक प्रस्ताव दें, जिनसे विश्वविद्यालय के समग्र विकास को गति मिले।
