रजिस्ट्री के बाद भी जमीन आपके नाम नहीं हुई तो क्या करें? जानिए दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया
जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (नामांतरण) कराना अनिवार्य है ताकि राजस्व अभिलेखों में नए मालिक का नाम दर्ज हो ...और पढ़ें

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HighLights
रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज न होने पर विवाद संभव।
धोखाधड़ी से बचने के लिए नामांतरण की जांच करें।
विवेक शुक्ला, गोरखपुर। जमीन या प्रॉपर्टी खरीदने के बाद केवल बैनामा (रजिस्ट्री) करा लेना ही मालिकाना हक की पूरी कानूनी प्रक्रिया नहीं है। रजिस्ट्री के उपरांत राजस्व अभिलेखों (सरकारी रिकॉर्ड) में भी नए खरीदार का नाम दर्ज कराया जाना अनिवार्य होता है, जिसे आम भाषा में दाखिल-खारिज या नामांतरण कहा जाता है।
यदि समय रहते यह कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो भूलेख और सरकारी रिकॉर्ड में पुराना मालिक ही दर्ज रहता है, जिससे भविष्य में धोखाधड़ी, संपत्ति बिक्री और स्वामित्व से जुड़े कई गंभीर विवाद खड़े हो सकते हैं।
क्या है दाखिल-खारिज
जब जमीन के स्वामित्व में बदलाव होता है और नए मालिक का नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज किया जाता है, तो इसे नामांतरण कहा जाता है। जमीन खरीदने के मामले में रजिस्ट्री के बाद खरीदार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राजस्व रिकॉर्ड में भी उसका नाम दर्ज हो गया है।
रजिस्ट्री के बाद क्या करें
सबसे पहले रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें। इसके बाद नामांतरण की प्रक्रिया के लिए संबंधित राजस्व व्यवस्था में आवेदन किया जाता है। आवेदन में जमीन का विवरण और रजिस्ट्री से संबंधित जरूरी दस्तावेज लगाए जाते हैं।
आवेदन के बाद राजस्व विभाग स्तर पर अभिलेखों और संबंधित पक्षों की जांच की प्रक्रिया होती है। किसी तरह की आपत्ति होने पर उसका निस्तारण किया जाता है। सब कुछ सही पाए जाने पर राजस्व अभिलेख में नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है।

नाम दर्ज हुआ या नहीं, ऐसे करें जांच
नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद खरीदार को दोबारा भूलेख में खतौनी देखकर यह जांच करनी चाहिए कि संबंधित गाटा/खसरा नंबर में उसका नाम दर्ज हुआ है या नहीं।
सिर्फ रजिस्ट्री का कागज देखकर संतुष्ट न हों। रजिस्ट्री के दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का गाटा नंबर, क्षेत्रफल और नाम आपस में मिलाकर देखना बेहतर है।
नामांतरण न कराने पर क्या परेशानी हो सकती है
अगर रजिस्ट्री के बाद राजस्व अभिलेख में नाम अपडेट नहीं हुआ है तो आगे जमीन से जुड़े कई कामों में रिकॉर्ड को लेकर परेशानी सामने आ सकती है। इसलिए खरीद के बाद नामांतरण की स्थिति की जांच करना महत्वपूर्ण है।
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एक जरूरी सावधानी
दाखिल-खारिज को जमीन के मालिकाना हक का अकेला अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। जमीन खरीदने से पहले और बाद में रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है। किसी विवाद या दस्तावेजी कमी की स्थिति में संबंधित राजस्व/पंजीकरण कार्यालय या योग्य कानूनी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
