गोरखपुर, जेएनएन। खरीफ के सीजन में किसान भाई मचान पर लता वाली सब्जियों की खेती कर अच्‍छा मुनाफा कमा सकते हैं। कद्दू वर्गीय सब्जियों की बुवाई के लिए यह समय काफी मुफीद है। 15 जून से लेकर 15 जुलाई तक इन सब्जियों की खेती की जा सकती है। एक बार तैयार की गई मचान का तीन साल तक उपयोग किया जा सकता है।

एक बार मचान तैयार कर तीन साल तक खेती कर सकते हैं किसान

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज, अयोध्या से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र बेलीपार के कृषि विज्ञानी डा. एसपी सिंह बताते हैं कि लौकी, करेला, खीरा, नेनुआ आदि सब्जियों को कद्दू वर्गीय सब्जी की श्रेणी में रखा जाता है। इन सब्जियों की खेती के लिए एक एकड़ खेत में मचान बनाने में आठ फिट लंबाई वाले करीब छह सौ बांस के टुकड़े का इस्तेमाल करना होगा। 10-10 फिट की दूरी पर बांस के इन टुकड़ों को खेत में गाड़ देना चाहिए। पतले तार को एक बांस से दूसरे बांस को जोड़ते हुए बांध देना चाहिए। सब्जी की लताओं को सहारा देने के लिए इन तारों का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे करें बुवाई

बुवाई करने के लिए किसान भाई पहले तीन-तीन मीटर की दूरी पर दो घन फिट के गड्ढे खोद लें। गोबर की खाद में ट्राइकोडरमा पाउडर मिलाकर इन गड्ढों में भर दें। इसके बाद उन्नत प्रजाति के बीज का चयन कर इन गाड्ढों में बुवाई कर दें। पौधों में वृद्ध होने पर लताओं को सहारा देकर मचान पर चढ़ा देना चाहिए।

इन बीजों का करें उपयोग

लोकी : नरेंद्र रश्मि, काशी गंगा, काशी बहार, अनोखी, सरिता, माही गोल्ड

करेला : नरेंद्र बारहमासी - 1, काशी हरित, पूसा विशेष, अमन श्री, प्राची, राकर, कल्याणपुर बारहमासी, पूसा दो मौसमी

नेनुआ : पूसा चिकनी, वाइट सीडेड, एस - 16, माया

खीरा : पूसा सयोग, अमन, प्रिया, स्वर्ण स्वेता, स्वर्ण पूर्णा

ऐसे करें रोगों से बचाव

लता वाली सब्जियों में लास निकलने और फल-फूल गिरने की समस्या आती है। इससे बचाव के लिए प्रति एकड़ की दर से चार किग्रा बोरेक्स को गोबर की खाद में मिला कर सब्जियों की जड़ में डाल देनी चाहिए। इसके अलावा एक लीटर पानी में दो ग्राम बोरेक्स मिलाकर सब्जियों पर छिड़काव करना चाहिए। जड़ सडऩ रोग से बचाने के लिए दो ग्राम कार्बेडाजिम एक लीटर पानी में मिलाकर जड़ में डालना चाहिए।

Edited By: Pradeep Srivastava