गोरखपुर, जेएनएन। पैसेंजर (सवारी गाडिय़ां) के बाद अब स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेनों को भी यात्री नहीं मिल रहे हैं। गोरखपुर- लखनऊ और गोरखपुर- मंडुआडीह इंटरसिटी सहित लोकल रूटों पर चल रहीं अधिकतर एक्सप्रेस ट्रेनें घाटे में चल रही हैं। ऐसे में पैसेंजर की तरह एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने घाटे का हवाला देते हुए दर्जन भर एक्सप्रेस ट्रेनों की सूची रेलवे बोर्ड को भेजी है। इन ट्रेनों को अगले आदेश तक निरस्त करने की तैयारी शुरू हो गई है।

पैसेंजर के बाद अब एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेनों को भी नहीं मिल रहे यात्री

 पूर्वोत्तर रेलवे में जिस तेजी के साथ पैसेंजर और डेमू ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ, उसी तेजी के साथ बंद भी होने लगा। आज स्थिति यह है कि गोरखपुर से दर्जनभर पैसेंजर ट्रेनों में सिर्फ नरकटियागंज और सिवान रूट पर दो पेसेंजर और एक डेमू ट्रेन चल रही है। यह ट्रेनें भी कभी भी खड़ी हो सकती हैं। पैसेंजर ट्रेनों को तो अक्सर दर्जन भर यात्री भी नहीं मिलते हैं।  यही स्थिति कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों की हो गई है। अधिकतर ट्रेनें खाली ही दौड़ रही हैं। फिलहाल,  रेलवे बोर्ड ने नई दिल्ली-काठगोदाम स्पेशल एक्सप्रेस को नौ मई से अगले आदेश तक निरस्त कर दिया है। एक से दो दिन में गोरखपुर, लखनऊ, छपरा और वाराणसी रूट पर चलने वाली कुछ ट्रेनों को भी निरस्त कर देगा। उच्च अधिकारियों के स्तर पर इन ट्रेनों के यात्री, आमदनी और खर्च की समीक्षा की जा रही है। महाराष्ट्र, गुजरात, सिकंदराबाद, दिल्ली और पंजाब से गोरखपुर आने वाली स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेनों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर ट्रेनें खाली ही चल रही हैं। जो प्रवासी अपने घर पहुंच गए हैं वह अभी वापस नहीं जाना चाहते। उनका कहना है कि अब स्थिति सामान्य हो जाएगी तभी घर से बाहर कदम रखेंगे। ऐसे में गोरखपुर से दिल्ली और मुंबई जाने वाली ट्रेनों को भी यात्री नहीं मिल रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर में लगभग 70 फीसद यात्री कम हो गए हैं। 

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