सिद्धाथर्नगर में पहला दबाव ही नहीं झेल सका भरा गया गैप

सिद्धार्थनगर : राप्ती के कहर से ग्राम पंचायतों को सुरक्षित रखने के लिए शाहपुर-भोजपुर बांध तो बना है, लेकिन एक दर्जन से अधिक स्थानों पर छोड़े गए छोटे बड़े गैप लोगों के लिए जी का जंजाल बने हुए हैं। पिछले वर्ष इन गैपों को भरने के लिए भारी भरकम धनराशि अवमुक्त हुई जिससे भूमि अधिग्रहण कर गैप भरे जाने के साथ बांध की मरम्मत का कार्य होना शामिल था। इक्का-दुक्का स्थानों पर सिंचाई निर्माण खंड ने भूमि अधिग्रहण कर गैप भरवाया, लेकिन काम इतने निम्न दर्जे का हुआ कि बीते दिनों राप्ती के बढ़े जल स्तर के बाद भरे गए गैप में दरारे पड़ने लगी हैं और कई जगह से मिट्टी कटकर नदी में समाहित हो चुकी है।

शाहपुर-भोजपुर बांध के लिए बीते सत्र में शासन से 70 करोड़ रुपये की धनरशि अवमुक्त की। सिंचाई विभाग ने ग्राम पंचायत धनोहरा में लगभग 40 मीटर का गैप भूमि अधिग्रहण करवाने के बाद भरा गया। लेकिन काम इतना खराब हुआ कि राप्ती का जलस्तर थोड़ा ही बढ़ा गैप में दरार दिखने लगा और किया गया पटान भी आधा भर भरा कर नदी में समा गया है। सत्यनारायण, अखिलेश, मुमताज, दुलारे गुप्ता, संजय, मुमताज आदि का कहना है कि काम मानक के अनुसार नहीं हुआ, जिसके कारण गैप में दरार आ चुकी है। यदि नदी का स्तर दोबारा बढ़ा तो गैप का कटना तय है और कई गांव फिर तबाह होंगे।

एसडीएम डुमरियागंज विकास कश्यप ने बताया कि शाहपुर-भोजपुर बांध का निरीक्षण किया जाएगा। जहां मानक के अनुरूप कार्य नहीं हुआ है, वहां के बारे में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी।

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