गोरखपुर में कांग्रेस का 'वोट बचाओ देश बचाओ' अभियान तेज, मतदाता सूची और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
कांग्रेस 'वोट बचाओ-देश बचाओ' अभियान को गति देगी, जिसके तहत 25 नवंबर तक गांवों में चौपाल लगाई जाएंगी।

HighLights
कांग्रेस 'वोट बचाओ-देश बचाओ' अभियान को गांवों तक पहुंचाएगी।
25 नवंबर तक चौपालों में मतदाता सूची की अनियमितता पर ध्यान।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए सवाल।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। वोट बचाओ-देश बचाओ अभियान को कांग्रेस गति देगी। इसके लिए 25 नवंबर तक गांवों में चौपाल लगाए जाएंगे। बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की सहायता से मतदाता सूची में अनियमितता की जानकारी दी जाएगी। यह जानकारी पत्रकारों से वार्ता में पर्यवेक्षक अनिल भारद्वाज ने दी।
उन्होंने कहा कि एक भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए कांग्रेस बूथ स्तर तक संघर्ष करेगी। कहा कि देश में लोकतंत्र, संविधान और आम नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी व्यापक जनजागरण अभियान चला रही है।
मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों तथा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कांग्रेस द्वारा व्यक्त की गई चिंता को लेकर यह अभियान गांव-गांव, गली-गली और प्रत्येक मतदान केंद्र तक पहुंचाया जाएगा।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कांग्रेस महासचिव व सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में चल रहा बोट बचाओ देश बचाओ अभियान लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प है।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और उनके इस्तीफे की मांग की है। चुनाव आयोग को उठाए गए सवालों का पारदर्शी एवं तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। जिलाध्यक्ष राजेश कुमार तिवारी ने कहा कि एक नवंबर को नई दिल्ली में जनभागीदारी रैली में शामिल होने के लिए सभी कांग्रेस तैयार हैं। इस दौरान गोरखलाल श्रीवास्तव, ज्ञानेंद्र शाही मुन्ना, दयानंद सिंह दुसाध आदि मौजूद रहे।
करंट से युवकों की मृत्यु की उच्चस्तरीय जांच हो
अनिल भारद्वाज ने गुलरिहा क्षेत्र में करंट से युवकों की मृत्यु की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कहा कि यह हादसा धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक सतर्कता और हाईटेंशन लाइनों के आसपास सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
