गोरखपुर, प्रभात कुमार पाठक। परिषदीय स्कूलों के बच्चे स्कूल का नाम तक नहीं लिख पाते। गणित में तो सर्वाधिक कमजोर हैं। सुनकर आश्चर्य होगा पर यह सच है। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की टीम द्वारा कक्षा से चार से आठ तक के बच्चों की काउंसिलिंग में सरकारी स्कूलों के बच्चे लिखने में कमजोर मिले। इन बच्चों में कोरोनाकाल के दौरान दो साल तक स्कूल व पढ़ाई से दूर रहने का असर साफ दिखा।

मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की टीम स्कूलों में जाकर कर रही बच्चों की काउंसिलिंग

मनोविज्ञान केंद्र की टीम सवा माह में जिले के 15 स्कूलों के कक्षा चार से आठ तक के 350 बच्चों की काउंसिलिंग कर चुकी है। इसके लिए टीम ने बाकायदा तीस प्रश्नों तैयार किए हैं, जिसके जवाब बच्चों को हां और ना में देना है। इसी आधार पर उनके मनोदशा की जानकारी की जाती है। काउंसिलिंग के दौरान मनोवैज्ञानिक ने कक्षा चार के बच्चों से कक्षा तीन की पुस्तक पढ़वाकर देखा।

पुस्तक देखकर उन्हें लिखने के लिए कहा गया लेकिन उन्हें लिखने में परेशानी हो रही थी। कई बच्चे जहां प्राथमिक तक नहीं लिख पा रहे थे वहीं कई अपना नाम भी सही नहीं लिख सके। कक्षा चार व पांच के बच्चे लिखने में सर्वाधिक कमजोर मिले। जबकि अन्य कक्षाओं के बच्चे लिखने में तो ठीक थे लेकिन गणित में सबकी स्थिति एक समान मिली।

बच्चों से पूछे गए ऐसे सवाल

क्या आपको कोरोना महामारी के दौरान पढ़ाई करने में परेशानी हुई है।

क्या आपको स्कूल के द्वारा आनलाइन क्लासेज की सुविधा दी गई।

क्या आप आनलाइन क्लास करने के लिए खुद से तैयार रहते थे।

आपने कोरोना महामारी के दौरान आनलाइन क्लास किया था।

क्या आपके माता-पिता पढ़ाई में सहयोग करते थे।

सुधार के लिए कार्यशाला का आयोजन

काउंसिलिंग के बाद केंद्र के विशेषज्ञ शिक्षा विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपकर बच्चों के पठन-पाठन में सुधार के लिए सुझाव देंगे। इसके अलावा पहले जिला, फिर ब्लाक और बाद में स्कूल स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। जिसमें शिक्षकों के जरिये पढ़ने-लिखने के तौर-तरीके बताकर बच्चों की कमजोरियां दूर की जाएगी।

काउंसिलिंग के लिए मैंने 30 प्रश्न तैयार किए हैं। जिनका जवाब हां या ना में देने हैं। अब तक 350 बच्चों से सवालों के जवाब लिए जा चुके हैं। काउंसिलिंग के दौरान बच्चों के अंदर पढ़ने की लालसा देखने को मिली लेकिन वे कुछ भी समझकर बोलने में हिचकिचा रहे हैं। लिखने में उन्हें काफी परेशानी हो रही है। आनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चे गणित में सर्वाधिक कमजोर मिले। क्योंकि गणित को आनलाइन समझ पाना कठिन है। - सीमा श्रीवास्तव, मनोवैज्ञानिक, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र।

Edited By: Pradeep Srivastava