गोरखपुर, जेएनएन। चंद्रयान-दो को लेकर लोगों का उत्साह अभी भी बरकरार है। चांद पर उतर रहे लैंडर विक्रम से भले ही संपर्क टूट गया, लेकिन भारतीयों की उम्मीदें अभी भी नहीं टूटी हैं। जागरण ने जब चंद्रयान-दो के चांद से दो कदम दूर रहने के सवाल पर विशेषज्ञों से राय जाननी चाही तो सभी ने एक स्वर में कहा कि हमें उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि अगली बार सफलता जरूर कदम चूमेगी।

चंद्रयान-दो को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों का प्रयास सराहनीय है। अभी तक साउथ पोल पर विश्व के किसी भी देश ने लैंडर नहीं भेजा। भारत पहला देश है, जिसने यह कार्य किया है। चंद्रयान-दो में चांद पर उतर रहे लैंडर विक्रम से भले ही हमारा संपर्क टूट गया, लेकिन आर्बिटर (कक्षीय उपकरण) में जो उपकरण हैं, वह काफी अच्छे हैं और कार्यरत हैं। इसका कार्यकाल एक साल है। उम्मीद है अगले प्रयास में हमें सफलता जरूर मिलेगी। - प्रो.शांतनु रस्तोगी, भौतिक विज्ञान विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय

कोई भी सफलता पीछे की कई असफलताओं के बाद ही मिलती है। चंद्रयान-दो सफलता की तरफ हमारा बढ़ता एक और कदम है। सिर्फ विक्रम लैंडर से हमार संपर्क टूटा है। इसके अन्य उपकरण अभी भी बेहतर कार्य कर रहे हैं। इससे हमें जो डेटा मिलेंगे, वह हमारे लिए काफी फायदेमंद होंगे। - डॉ. अपरा त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर, भौतिक विज्ञान विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय

जिस लैंडर की सूचना मिल रही है यदि वह डिस्ट्रॉय (नष्ट) नहीं हुआ होगा तो हम उसे फिर से कनेक्ट करने की कोशिश करेंगे। आर्बिटर में जो भी उपकरण लगे हैं, वह हमें बेहतर रिजल्ट देंगे। अगले प्रयास में इस बार की कमियों को दूर हर हमारे वैज्ञानिक देशवासियों को सफलता की सौगात देंगे। - राहुल आनंद, शोध छात्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय

चंद्रयान-दो के चांद पर लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने के पीछे कुछ तकनीकी बाधा आईं। बावजूद इसके यह मिशन सफल रहा। चंद्रयान के अन्य उपकरण बेहतर कार्य कर रहे हैं। इसके परिणाम भी हमें मिलेंगे। आगे और बेहतर करेंगे। - संजय यादव, शोध छात्र, दीनदयाल उपाध्याय, गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर

चंद्रयान-दो को हम अपने लक्ष्य प्राप्त करने से चूक जरूर गए, लेकिन इससे हमें काफी कुछ सीखने को मिलेगा। फिलहाल चंद्रयान में अन्य उपकरण ठीक कार्य कर रहे हैं। उनसे फोटोग्राफ मिलने से वहां की वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी जानकारी मिल सकेगी। - प्रयागराज सिंह, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय

चांद पर उतर रहे लैंडर विक्रम से भले ही हमारा संपर्क टूट गया फिर भी हम 95 फीसद मकसद में सफल रहे। यह माना जा रहा था कि गति कंट्रोल न होने के कारण दिक्कत आई। अगली बार हम सौ फीसद सफल होंगे। - शिवांगी गौतम, छात्रा, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय

चंद्रयान-दो को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों ने जो इतिहास रचा है इसको लेकर हम सभी गौरवान्वित हैं। यह एक कीर्तिमान बना है। भले ही हम लैंडर को चांद पर उतारने में पूरी तरह से सफल नहीं हो सके, लेकिन इस अद्भुत क्षण को टीवी पर देखकर अपने को भारतीय होने पर गर्व है। - श्रुति यादव, छात्रा, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय।

Posted By: Pradeep Srivastava

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