गोरखपुर, जागरण संवाददाता। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। रोगियों की सुविधा के लिए शासन ने 40 बेड का अति आधुनिक लेबर कांपलेक्स बनवा दिया है लेकिन अभी आधे बेडों पर ही रोगी भर्ती किए जा रहे हैं। इस वजह से ऑपरेशन के बाद एक बेड पर दो प्रसूताओं को भर्ती करना पड़ रहा है। ऑपरेशन की परेशानी के साथ-साथ उन्हें ठीक से लेटने को भी नहीं मिल रहा है। एक दिन उनका इसी तरह गुजरता है। दूसरे दिन उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। आए दिन वहां भी एक बेड पर दो रोगियों को भर्ती करने की नौबत आ जाती है।

ये है स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग का हाल

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आठ बेड का पुराना लेबर रूम है। वहां सामान्य प्रसव (नार्मल डिलीवरी) कराने की कोशिश की जाती है। वहां भी एक-एक बेड पर दो गर्भवती भर्ती की जाती हैं। यदि ऑपरेशन से प्रसव (सिजेरियन) की जरूरत पड़ी तो उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले जाया जाता है। आपरेशन के बाद उन्हें एक दिन के लिए नए बने लेबर कांपलेक्स में भर्ती किया जाता है। 40 बेड के इस कांपलेक्स में मात्र 20 बेड ही रोगियों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। इसलिए एक-एक बेड पर दो-दो प्रसूताओं को भर्ती करना पड़ता है। इसके बाद सर्जिकल वार्ड नंबर एक में उन्हें शिफ्ट किया जाता है। 54 बेड का यह वार्ड भी आए दिन छोटा पड़ जाता है। इसके अलावा सात नंबर वार्ड भी इसी विभाग का है, जहां सामान्य प्रसव वाली महिलाएं भर्ती की जाती हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में लंबे समय से यह व्यवस्था चल रही है। केवल लेबर कांपलेक्स की सुविधा ही हाल में बढ़ी है। लेकिन रोगियों की संख्या में लगभग दो गुना की वृद्धि हुई है। इस वजह से उन्हें भर्ती करने और समुचित उपचार की व्यवस्था बेपटरी हो गई है।

वार्ड के गलियारे में घूमते रहते हैं कुत्ते

मेडिकल कालेज में सुरक्षा के लिए हर गेट पर गार्ड की तैनाती है लेकिन वे मौके पर मौजूद नहीं रहते। इस वजह से कुत्ते वार्डों में घुस जाते हैं। रोगियों का खाना जूठा कर देते हैं या लेकर भाग जाते हैं। मारने या भगाने पर भौंकने लगते हैं। वार्ड से कुत्तों को स्वजन खदेड़ देते हैं लेकिन गलियारों में वे हमेशा सोए या घूमते मिल जाएंगे। गुरुवार को स्त्री एवं प्रसूति विभाग के सर्जिकल वार्ड नंबर एक तथा मेडिसिन वार्ड नंबर 11 के गलियारे में कुत्ते घूम रहे थे।

क्या कहते हैं अधिकारी

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. पवन प्रधान ने बताया कि जो कमियां हैं, उन्हें धीरे-धीरे दुरुस्त किया जा रहा है। शीघ्र ही लेबर कांपलेक्स के शेष 20 बेड भी रोगियों के लिए उपलब्ध करा दिए जाएंगे। कुत्तों व आवांछित तत्वों पर नजर रखने के लिए गार्डों को निर्देशित किया गया है। यदि वे लापरवाही बरत रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Pragati Chand

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट