बिश्नोई गैंग के गुर्गे श्रेयांश यादव का पुराना आपराधिक इतिहास, गोरखपुर में फिर खुलेगी फायरिंग केस की फाइल
बिश्नोई-गोल्डी गैंग से जुड़े श्रेयांश यादव का पुराना आपराधिक इतिहास सामने आया है, जिसके खिलाफ सात मुकदमे दर्ज हैं। गोरखपुर ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
बिश्नोई-गोल्डी गैंग से जुड़े श्रेयांश यादव का आपराधिक इतिहास उजागर।
गोरखपुर सर्किट हाउस फायरिंग में शामिल था, पता न होने से बचा।
पुलिस अब पुराने मामलों की फाइलें फिर से खोल रही है।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बिश्नोई-गोल्डी गैंग से जुड़े बताए जा रहे असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच में सामने आए श्रेयांश यादव का पुराना आपराधिक इतिहास भी पुलिस की पड़ताल के दायरे में आ गया है। बिहार के गोपालगंज जिले के विजयीपुर गांव का रहने वाला श्रेयांश गोरखनाथ क्षेत्र में किराए के मकान में रहता था।
पुलिस की जांच में उसके विरुद्ध सात मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। करीब दो वर्ष पहले वर्चस्व की लड़ाई में सर्किट हाउस के पास विपिन कन्नौजिया उर्फ सुल्तान पर हुई फायरिंग की घटना में भी वह शामिल था। लेकिन पता तस्दीक न हो पाने की वजह से पुलिस ने आरोप पत्र में उसका नाम शामिल नहीं किया।
तीन अक्टूबर 2024 को दोपहर करीब 12 बजे सुल्तान अपने रिश्तेदार से मिलने के लिए सर्किट हाउस के पास पहुंचे थे। इसी दौरान आरोपितों ने उन पर फायरिंग कर दी थी। उस दिन शहर में वीआइपी का दौरा भी था। घटना से इलाके में सनसनी फैल गई थी।
रामगढ़ताल पुलिस ने शुभम यादव, विशाल यादव समेत कई लोगों के विरुद्ध हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना के दौरान लारेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे श्रेयांश की भूमिका भी सामने आई, लेकिन उसका पता तस्दीक न हो पाने के कारण उस समय उसके विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया।
पुलिस के अनुसार, उसके विरुद्ध सात मुकदमे दर्ज हैं। गोरखनाथ में किराए पर रहते हुए वह किन लोगों के संपर्क में था और असलहा तस्करी से जुड़े लोगों से उसका संपर्क कब और कैसे हुआ, इसकी पड़ताल की जा रही है। अब बदमाश का पता तस्दीक होने के बाद रामगढ़ताल थाना पुलिस पुराने मामले की फाइल फिर से खंगाल रही है।
पुलिस पूरक आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी में है। इसके लिए घटना से जुड़े साक्ष्यों और श्रेयांश के पुराने संपर्कों की भी जांच की जा रही है। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि असलहा तस्करी में पकड़े गए और वांछित चल रहे बदमाशों का आपराधिक रिकार्ड जुटाया जा रहा है। सबके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। 31 आरोपितों में पांच की गिरफ्तारी हो चुकी है। 26 की तलाश में छापेमारी चल रही है।
पिस्टल खरीदने वाले पीएसी जवान और साथी का सुराग नहीं
असलहा तस्करी नेटवर्क की जांच में एक पीएसी जवान और उसके साथी का भी नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार, दोनों ने हत्या कराने के लिए श्रेयांश यादव से पिस्टल खरीदी थी। दोनों का अभी सुराग नहीं मिल पाया है।
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पुलिस उनकी तलाश के साथ यह पता कर रही है कि पिस्टल किससे खरीदी गई, भुगतान किस माध्यम से हुआ और हत्या के लिए किसे निशाना बनाने की योजना थी। दोनों के मोबाइल संपर्क और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भी पड़ताल की जा रही है।
