गोरखपुर, जेएनएन। कुख्यात राधे यादव की गिरफ्तारी के बाद अमरजीत गैंग पुलिस के निशाने पर है। गोरखपुर में सक्रिय गैंग के सदस्यों की सूची तैयार कर पुलिस उनकी संपत्ति जब्त कराने की तैयारी में है। आजमगढ़ जेल में बंद अमरजीत यादव का गैंग एक दशक से गोरखपुर के दियारा में सक्रिय है। गैंग की कमान इस समय अमरजीत के छोटे भाई रामजीत के हाथ में है।

बदमाशों के सफाए में लगी पुलिस को छानबीन में जानकारी मिली है कि जेल से छूटने के बाद कई बदमाश प्रापर्टी के कारोबार में जुटे हैं। दियारा के कुख्‍यात अमरजीत का भाई रामजीत भी प्रापर्टी डीलिंग कर रहा है। रंगदारी, लूट से मिले रुपये को इस काम में लगा रहे हैं। 27 जुलाई की रात बांसगांव इलाके में पुलिस से हुई मुठभेड़ में पुलिस ने बांसगांव के धस्‍का निवासी अमरजीत के साथी राधे यादव को तो गिरफ्तार कर लिया लेकिन रामजीत चकमा देकर फरार हो गया। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम रामजीत के साथ उसके गैंग के सदस्यों और शरणदाता को ढूंढ रही है।

2018 में भी खुला था भेद

दिसंबर 2018 में गोला के रतनपुर घाट से बालू की निकासी करने वाले ठीकेदार से 10 लाख रुपए की रंगदारी मांगी गई थी। क्राइम ब्रांच की मदद से पुलिस ने उरुवां , श्रीराम टड़वा के धनेष यादव, कैंट के दाउदपुर मोहल्ले के विवेक तिवारी उर्फ सोनू तिवारी, मनीष, झंगहा के पकड़ीपार निवासी अभय, और गगहा के घिसड़ी निवासी लोरिक यादव को गिरफ्तार कर घटना का पर्दाफाश किया। आरोपितों से पूछताछ करने पर पता चला कि रामजीत यादव के कहने पर रंगदारी मांगी गई थी। आरोपितों ने बताया कि प्‍लाट खरीदने के लिए ठीकेदार से रंगदारी मांगी गई थी। घटना में नाम सामने आने के बाद रामजीत ने आजमगढ़ में सरेंडर कर दिया और पुलिस भी खामोश हो गई। 

सीओ क्राइम व बांसगांव थानेदार को मिली जिम्‍मेदारी

एसएसपी डॉ. सुनील गुप्‍ता ने बताया कि अमरजीत गैंग के भाई रामजीत और गैंग के सदस्‍यों की तलाश चल रही है। छानबीन में यह बात सामने आयी है कि अमरजीत गैंग के सदस्‍य प्रापर्टी डिलिंग कर रहे हैं। गैंगेस्‍टर की कार्रवाई कर उनकी संपत्ति जब्‍त कराई जाएगी। एसओ बांसगांव और सीओ क्राइम को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं।

Posted By: Pradeep Srivastava

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