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गोरखपुर में अखिलेश का बड़ा दांव: चिल्लूपार से विनय शंकर तिवारी तय, बाकी प्रत्याशियों को दीवाली का इंतजार

Published: Thu, 10 Sep 2026 02:21 PM (IST)

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गोरखपुर के 2017-22 के प्रत्याशियों संग बैठक की, जिसमें चिल्लूपार सीट से विनय शंकर तिवारी ...और पढ़ें

सपा प्रमुख अखिलेश यादव व विनय शंकर तिवारी। फोटो- इंटरनेट मीडिया

सपा प्रमुख अखिलेश यादव व विनय शंकर तिवारी। फोटो- इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. अखिलेश यादव ने गोरखपुर के प्रत्याशियों के साथ की बैठक।

  2. चिल्लूपार से विनय शंकर तिवारी की उम्मीदवारी पर लगी मुहर।

  3. अन्य सीटों पर टिकटों का फैसला दीवाली के बाद होगा।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर में टिकट को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ में गोरखपुर के 2017 और 2022 के विधानसभा प्रत्याशियों, जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के साथ करीब दो घंटे बैठक की।

बैठक का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि चिल्लूपार को छोड़कर जिले की किसी सीट पर अभी प्रत्याशी तय नहीं है। चिल्लूपार से पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी की उम्मीदवारी पर पार्टी नेतृत्व ने मुहर लगा दी है। बाकी दावेदारों को दीवाली तक इंतजार करने को कहा गया है।

यह फैसला खासतौर पर कैंपियरगंज में चल रही टिकट की जोर आजमाइश के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां हाल के दिनों में दावेदारों ने शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया है। खुद को पार्टी का प्रत्याशी बता नवीन यादव ने अगस्त में रैली निकालकर अपना चुनावी अभियान शुरू किया था, जबकि साधु यादव ने भी समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। साधु यादव की रैली के दौरान गोरखपुर-सोनौली हाईवे पर जाम की स्थिति भी बनी थी।

बैठक के दौरान पार्टी सूत्रों के अनुसार अखिलेश यादव ने कैंपियरगंज से दावेदारी कर रहे साधु यादव से सीधे पूछा- ‘ये कंपटीशन क्यों कर रहे हो?’ साधु ने अपनी बात रखी। इसके बाद सपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अभी गोरखपुर में केवल चिल्लूपार से विनय शंकर तिवारी का नाम तय किया गया है। बाकी सीटों पर फैसला बाद में होगा।

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राजनीतिक रूप से देखें तो यह संदेश सिर्फ कैंपियरगंज तक सीमित नहीं है। गोरखपुर की लगभग हर विधानसभा सीट पर टिकट को लेकर कई दावेदार सक्रिय हैं। बैठक में जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम और महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी के अलावा 2017 और 2022 में प्रत्याशी रहे विनय शंकर तिवारी, काजल निषाद, अमरेंद्र निषाद, सुभावती शुक्ला, विजय बहादुर यादव, यशपाल सिंह रावत और चिल्लूपार से विनय शंकर तिवारी मौजूद रहे।

अखिलेश का मौजूदा रुख संकेत देता है कि पार्टी पिछली चुनावी हार के आधार पर सीधे पुराने चेहरों को दोहराने के बजाय संगठन, बूथ प्रबंधन और स्थानीय समीकरणों का आकलन कर अंतिम फैसला लेना चाहती है। बैठक में भी प्रत्याशियों को बूथ स्तर पर मतदाताओं को सहेजने और चुनाव की तैयारी में जुटने का संदेश दिया गया।

चिल्लूपार में विनय की दावेदारी से निकला बड़ा राजनीतिक संदेश
चिल्लूपार में विनय शंकर तिवारी पर भरोसा कायम रखना सपा की पूर्वांचल रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी 2017 में बसपा के टिकट पर विधायक बने थे। उन्होंने बसपा के ही टिकट पर 2012 में विधायक चुने गए राजेश त्रिपाठी को तीन हजार से अधिक मतों से हराया था।

2022 में विनय शंकर सपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा के राजेश त्रिपाठी से 21,645 मतों से हार गए। इसके बावजूद अखिलेश यादव ने उन्हें सबसे पहले हरी झंडी दी।

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पूर्वांचल की राजनीति में हरिशंकर तिवारी परिवार की राजनीतिक पकड़ और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच प्रभाव को देखते हुए यह फैसला सपा की सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है। विनय शंकर तिवारी को पहले भी सपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

दीवाली बाद अधिवेशन, अखिलेश भी शामिल होंगे
दीवाली के बाद प्रस्तावित सपा अधिवेशन में अखिलेश यादव के गोरखपुर आने की बात कही जा रही है। ऐसे में संभावना है कि अधिवेशन के बाद ही प्रत्याशियों के नाम सामने आएं। तब तक सपा नेतृत्व ने दावेदारों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा को संगठनात्मक तैयारी में बदलने की रणनीति अपनाई है।

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राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बैठक बुलाई थी। संगठन से लेकर चुनाव और प्रत्याशिता सभी बिंदुओं पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि सिर्फ चिललूपार से विनय शंकर तिवारी का ही टिकट फाइनल है। बाकी सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा दीवाली के बाद होगी।आपसी मनमुटाव भूल हर कोई बूथ तक पार्टी को मजबूत करने में जुटे।

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- ब्रजेश गौतम, जिलाध्यक्ष, सपा