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AIIMS गोरखपुर में सितंबर तक शुरू होंगी कैथ लैब, रोबोटिक सर्जरी और आईवीएफ सुविधाएं

Published: Sat, 11 Jul 2026 11:39 AM (GMT+05:30)

एम्स गोरखपुर अपना सातवां स्थापना दिवस मना रहा है, जहां अध्यक्ष प्रो. हेमंत कुमार ने संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य ...और पढ़ें

मीडिया से बात करते एम्स के अध्यक्ष डा. प्रो.हेमंत कुमार तथा निदेशक डॉ विभा दत्ता। जागरण

मीडिया से बात करते एम्स के अध्यक्ष डा. प्रो.हेमंत कुमार तथा निदेशक डॉ विभा दत्ता। जागरण

HighLights

  1. एम्स गोरखपुर मना रहा अपना सातवां स्थापना दिवस।

  2. सितंबर तक कैथ लैब, रोबोटिक सर्जरी की सुविधा।

  3. आईवीएफ सेंटर के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर शनिवार को अपना सातवां स्थापना दिवस मना रहा है। इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में संस्थान के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. (डा.) हेमंत कुमार एवं कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेजर जनरल (डा.) विभा दत्ता ने पिछले सात वर्षों की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।

प्रो. (डा.) हेमंत कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप नए एम्स संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य देश में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करना है। एम्स गोरखपुर भी इसी उद्देश्य के साथ पूर्वांचल, बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों और नेपाल से आने वाले रोगियों को गुणवत्तापूर्ण तृतीयक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

उन्होंने बताया कि एम्स के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं—उच्चस्तरीय रोगी उपचार, चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा अनुसंधान। इन तीनों क्षेत्रों में संस्थान लगातार प्रगति कर रहा है। फैकल्टी की कमी देशव्यापी चुनौती है, फिर भी रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

अध्यक्ष ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में संस्थान की ओपीडी में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में प्रतिदिन औसतन करीब 5,000 रोगी ओपीडी सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि एम्स गोरखपुर केवल सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं ही नहीं दे रहा, बल्कि प्राथमिक और द्वितीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध करा रहा है, ताकि किसी भी रोगी को उपचार से वंचित न होना पड़े।

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प्रो. हेमंत कुमार ने कहा कि संस्थान में बेड पर लगभग 85 प्रतिशत रोगी भर्ती हो रही है। आपातकालीन रोगियों के लिए आवश्यक बेड उपलब्ध रखना भी आवश्यक है। आपरेशन की प्रतीक्षा अवधि भी लगातार कम की जा रही है और इसके लिए सभी शल्य चिकित्सा विभागों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।

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भविष्य की योजनाओं पर उन्होंने बताया कि संस्थान में सितंबर तक कैथ लैब शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी अवधि में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। साथ ही आइवीएफ सेंटर के लिए टेंडर प्रक्रिया भी चल रही है।

उन्होंने कहा कि एम्स का लाभ केवल पूर्वांचल तक सीमित नहीं है। बिहार के सीमावर्ती जिलों और नेपाल से बड़ी संख्या में रोगी यहां उपचार के लिए आ रहे हैं। इससे रोगियों का यात्रा समय और उपचार पर होने वाला निजी खर्च कम हुआ है तथा उन्हें अपने क्षेत्र के निकट ही उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है। कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता ने कहा कि रोगी सेवाओं में सुविधाओं का विस्तार हमारी प्राथमिकता है।