अब तीन मिनट में सर्जरी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगा 'सर्जन ओएस', गोरखपुर एम्स ने विकसित किया एप
गोरखपुर एम्स के डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने 'सर्जन ओएस' नामक एक ऐप विकसित किया है, जो सर्जरी का पूरा ब्योरा केवल तीन मिनट में डिजिटल रूप से सुरक्षित रखेगा।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
गोरखपुर एम्स ने 'सर्जन ओएस' ऐप विकसित किया।
तीन मिनट में सर्जरी का पूरा डिजिटल ब्योरा।
पुराने रिकॉर्ड खोजने, कानूनी मामलों में सहायक।
अरुण कुमार, गोरखपुर। सर्जरी के बाद ऑपरेशन का पूरा ब्योरा अब तीन मिनट में सुरक्षित रखा जा सकेगा। यह संभव होगा उस सर्जन ओएस (ऑपरेटिंग सिस्टम) एप से जिसे गोरखपुर एम्स के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने विकसित कराया है।
एंड्रायड, आइओएस और वेब प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध यह एप तीन मिनट में हिंदी, अंग्रेजी दोनों भाषाओं में चिकित्सक, रोगी से लेकर सर्जरी और उसमें शामिल पूरी टीम की जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज कर देगा।
वर्षों बाद भी रोगी के नाम, उम्र अथवा आपरेशन के महीने और वर्ष के आधार पर रिकॉर्ड खोजा जा सकेगा। इसी रिकॉर्ड से डिस्चार्ज का विवरण और दवाओं की पर्ची तैयार होगी, जबकि पुराने मामलों में न्यायालय के समक्ष तथ्य रखने और सर्जरी के परिणामों के तुलनात्मक अध्ययन में भी मदद मिलेगी।
अभी इसका उपयोग घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए हो रहा है। हड्डियों की चोट और फ्रैक्चर की सर्जरी को भी इससे जोड़ने की तैयारी है।
चिकित्सक डॉ. अरुण पांडेय ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से एप में कई जानकारियां पहले से निर्धारित की गई हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार चुना जा सकता है। इससे बार-बार एक जैसी जानकारी लिखने में लगने वाले समय की बचत होगी।
रोगी का नाम, उम्र या ऑपरेशन के महीने और वर्ष के आधार पर पुराना रिकॉर्ड खोजा जा सकता है। डिस्चार्ज का विवरण और दवाओं की पर्ची तैयार कर प्रिंट करने की सुविधा भी है। जानकारी हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराई जा सकती है।
डॉ. अरुण ने बताया कि सर्जरी से जुड़े मामलों में चिकित्सकों को कई बार वर्षों बाद न्यायालय में बयान देना पड़ता है। इतने समय बाद आपरेशन की पूरी प्रक्रिया, रक्तस्राव की मात्रा और उपचार के दौरान सामने आई जटिलताओं का सटीक विवरण याद रखना कठिन होता है।
एप में सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड पुराने मामले की तथ्यात्मक जानकारी याद करने और न्यायालय में पक्ष रखने में मदद कर सकता है। इसका प्रस्तुतीकरण मंगलौर ज्वाइंट कान्क्लेव 2026 और वाराणसी में आयोजित आर्थो एज कान्क्लेव 2026 में किया गया। वहां चिकित्सकों ने इसमें रुचि दिखाई और उपयोगिता पर चर्चा की।
शोध और उपचार में भी उपयोगी
एप से चिकित्सक सालभर में किए गए ऑपरेशन, उनकी अवधि और सामने आई जटिलताओं का तुलनात्मक अध्ययन कर सकेंगे। इससे सर्जरी की तकनीक और उपचार की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। फिलहाल इसका उपयोग घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण के रिकॉर्ड के लिए हो रहा है।
हड्डियों की चोट और फ्रैक्चर के आपरेशन का ब्योरा दर्ज करने का प्रारूप भी तैयार किया गया है, जिसका परीक्षण चल रहा है। डाक्टर अरुण ने बताया कि एप की अवधारणा एम्स, दिल्ली में 2016 से 2019 के बीच रेजीडेंसी के दौरान विकसित हुई।
डॉ. सुमिता नंद के साथ विचार-विमर्श और प्रोफेसर सीएस यादव के मार्गदर्शन में इस दिशा में काम शुरू हुआ। चिकित्सकों के सुझावों पर इसमें लगातार सुधार किए गए हैं।
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