देवरिया, जेएनएन। गन्ना परिक्षेत्र गौरीबाजार में बारिश के पाली से हुए जलजमाव से गन्ने की फसल में रेडरॉट बीमारी का प्रकोप शुरू हो गया है। इस बीमारी से लगभग चालीस फीसद फसल बर्बाद हो गयी हैं। कृषि विशेषज्ञ इसे गन्ने की फसल का कैंसर भी कहते हैं। विभाग ने अभी तक नुकसान का आंकलन नहीं किया गया है।

रेडरॉट रोग से खड़ी गन्ने की फसल जड़ से सूखती जा रही हैं। जिससे किसानों का काफी नुकसान हो रहा है। उनकी पूंजी डूब गयी है। इस रोग ने पेड़ी के उत्पादन पर भी खासा प्रभाव डाला है। यह फसल बीमा योजना की सूची में भी शामिल नहीं है।

इन गांवों में सर्वाधिक प्रकोप

गौरीबाजार गन्ना परिक्षेत्र के कुशीनगर जिले के गांव मोतीपाकड़, बलुआ, देवकली, बेलवाबाबू, चतुरचक तथा मठिया मिश्र तथा देवरिया जिले के सौवनालछमन, सौवना परशुराम, बढईपुरवा, चम्पापुर, सिरिसिया पाण्डेय, बसंतपुर, बागापार, अर्जुनडीहा, मदरसन, कतौरा, मोहनमठ, रसौली, चरियांवबुजुर्ग, चरियांवखास, तेन्दूबारी, सोहसा, गुलहरिया, करौदी, बडहरा, बखरा, हरपुर गांव में गन्ने की फसल सर्वाधिक प्रभावित हुई है।

उम्मीद के विपरीत हुई बारिश:

ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक कमरुद्दीन अंसारी ने कहा कि गन्ने की प्रजाति सीओ 0238 व 0118 ही अस्सी फीसद रकबा में अधिक पैदावार देख किसानों ने बुआई की। उम्मीद के विपरीत अधिक बारिश की वजह से जलभराव हो गया। इस वजह से गन्ना की फसल बीमारी की चपेट में है। यह प्रजाति लो लैंड यानि जलभराव वाले खेत के लिए नही हैं। लो लैंड में अर्ली 98014,समान्य यूपी 9534, कोशे 96436, कोशा 8279 ही उपयुक्त प्रजाति हैं।

गन्ना किसानों ने की मुआवजे की मांग: बीमारी व जलभराव के चलते बर्बाद हुई गन्ने की फसल के मुआवजे को लेकर किसान संशकित हैं। बागापार के परशुराम प्रसाद, कतौरा के मार्कडेय राय, बखरा के संजीव तथा मदरसन के राजेश सिंह का कहना कै कि नुकसान की पड़ताल करा कर किसानों को क्षतिपूर्ति दी जाए। गन्ने की फसल के नुकसान का आंकलन अभी नहीं हुआ है। विभागीय स्तर से क्षतिपूर्ति का कोई प्रावधान नहीं हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सूची में भी गन्ने की फसल शामिल नहीं हैं।

आनंद शुक्ला,जिला गन्ना अधिकारी

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