गोरखपुर, जेएनएन। संयुक्त स्नातक प्रवेश परीक्षा के लिए आए नाम मात्र के आवेदनों के चलते खाली रह गईं ढाई लाख सीटों पर प्रवेश के लिए एक और प्रयास किया जाएगा। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन इस बाबत विचार कर रहा है कि कॉलेजों को सीधे ही प्रवेश लेने का अधिकार दे दिया जाए। हालांकि सीधे प्रवेश लेने वाले छात्रों को प्रवेश परीक्षा के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना पड़ सकता है।

दरअसल, विश्वविद्यालय की प्रवेश समिति ने बगैर संयुक्त प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए किसी अभ्यर्थी का किसी महाविद्यालय में दाखिला लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है। पिछले वर्ष भी ऐसे प्रतिबंध थे, लेकिन बाद में खराब हालत को देखते हुए विश्वविद्यालय ने पुनर्विचार किया और कॉलेजों को सीधे प्रवेश लेने का अधिकार मिला। इसके चलते छात्र संख्या में इजाफा हुआ और करीब स्नातक में 2.85 लाख छात्रों का दाखिला हुआ। इस बार प्रवेश आवेदनों की संख्या और भी कम हो गई, ऐसे में कई कॉलेजों पर ताला लगाने तक की नौबत आ रही है। ऐसे में सीटें भरने के लिए कॉलेजों को अधिकार देने पर विचार हो रहा है।

ऐसे रहे हालात

विश्वविद्यालय की साझा स्नातक प्रवेश परीक्षा में बीए, बीएससी गणित, बीएससी जीवन विज्ञान, बीकाम सहित तमाम कोर्सों में सीटों के सापेक्ष नाम मात्र के आवेदन आए। बीए का उदाहरण लें तो इस बार इसमें 95 फीसद सीटें छात्रों के इंतजार में खाली रह जाएंगी। बीए में कुल 200,351 सीटें हैं, लेकिन प्रवेश के लिए दावेदार हैं महज 11371 यानी 5.67 फीसद। बीएससी जैसे महत्वपूर्ण कहे जाने वाले कोर्स की हालत भी ऐसी ही है। बीएससी गणित की 71 फीसद और जीव विज्ञान की 93 फीसद सीटों पर कोई पढऩे वाला नहीं है। बीकाम की कुल 31574 सीटों के लिए महज 4684 अभ्यर्थी प्रवेश लेने को इ'छुक रहे।

अधिक से अधिक सीटों पर दाखिला हो, इसके लिए हम भी प्रयासरत हैं। अभी संयुक्त प्रवेश काउंसिलिंग चल रही है, यह संपन्न हो जाए, इसके बाद खाली सीटों की स्थिति की समीक्षा करते हुए प्रवेश समिति कोई निर्णय लेगी। - प्रो. विजय कृष्ण सिंह, कुलपति।

Posted By: Pradeep Srivastava

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