जागरण संवाददाता, गोरखपुर

आपरेशन किसी मरीज के लिए न केवल मुसीबत लेकर आता है, बल्कि पीड़ा के साथ समय व पैसा भी अधिक खर्च होता है। यह सच है कि जहां जरूरी हो वहां बिना सर्जरी के काम नहीं चल पाता, लेकिन होम्योपैथ चिकित्सा पद्धति के जरिए कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनके बारे में यदि समय रहते पता चल जाए तो सर्जरी टाली जा सकती है। इसी तरह गंभीर मानसिक व मनोदैहिक रोगों में भी यह बीमारी बेहद कारगर है।

होम्योपैथ विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तरह के अध्ययनों में यह बात साबित हो चुकी है। वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक डा.रामरतन बनर्जी ने अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि अलग-अलग बीमारियों में मरीजों में सर्जरी टालने का प्रतिशत भी विभिन्न है। खूनी व वादी बवासीर, भगंदर, गुर्दे व मूत्र नली की पथरी के 95 फीसद मामले का इलाज इस पैथी से संभव है। रीढ़ व गर्दन की हड्डी का नस दबने से होने वाली बीमारियां सर्वाइकल स्पांडलोसिस एवं लंबर स्पांडलोसिस के नब्बे फीसद मामलों में राहत मिल सकती है। रीढ़ की हड्डी की टीबी, ब्रेन ट्यूमर, घेघा के अस्सी फीसद मरीज बिना सर्जरी ठीक हो सकते हैं। इसी तरह स्तन में गांठ, शरीर में गांठ, गर्भाशय में गांठ के 85 से नब्बे फीसद मामलों को इस पैथी के जरिये बिना सर्जरी के ठीक किया जा सकता है। टासिल ग्रंथिका के फूलने से होने वाले टांसिलाइटिस, नासा व कंठ के मिलने वाले स्थान पर गांठ अर्थात एडीनाएड राइनाइटिस व प्रोस्टेट के अस्सी फीसद मामलों का भी बिना सर्जरी इस विधा से इलाज हो सकता है।

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मनोदैहिक विकारों में रामबाण

डाक्टरों में पास पहुंचने वाले में मरीजों कई लक्षण ऐसे होते हैं, जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालते हैं, पर पैथालॉजिकल टेस्ट नार्मल आते हैं। जिला होम्योपैथ अस्पताल के डा.अनूप कुमार श्रीवास्तव के अनुसार वास्तव में इन बीमारियों की जड़ मरीज के मनोस्थिति में होती है। इनको साइकोसोमैटिक डिजीज या मनोदैहिक विकार कहते हैं। शुरू में बीमारी का पता लगने पर इनको जड़ से समाप्त किया जा सकता है। मरीज को हमेशा थकावट की शिकायत जैसे फैटीग सिंड्रोम, शरीर के किसी एक हिस्से की मांसपेशी में दर्द जैसे फाइब्रोमायल्जिया, बार-बार दस्त एवं कब्ज की शिकायत इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, तनाव से होने वाले सिरदर्द, सरवाइकल स्पांडलाइटिस, एक्जीमा, सोरियासिस, एलर्जी आदि मनोदैहिक बीमारियों के उदाहरण हैं। मानसिक तनाव, चिंता, घबराहट, चिड़चिड़ापन, बार-बार गुस्सा आने, कुछ बुरा होने की आशंका जैसी भावनात्मक समस्याओं को आधार बनाकर बड़ी तादाद में मरीज का इलाज किया गया। जिला होम्योपैथ चिकित्सालय 870 मरीजों पर किए गए अध्ययन में माइग्रेन के सत्तर फीसद, एक्जीमा, सोरियासिस, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के करीब पैंतालीस फीसद, अस्थमा, क्रानिक ब्रांकाइटिस, एलर्जी तथा स्तन के गांठ के मामलों में भी मरीजों को काफी लाभ हुआ। जिला होम्यापैथिक अस्पताल की डा.पुनीता के अनुसार यह पैथी नवजात व शिशुओं के बीमारियों में भी प्रभावी है। बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार, उल्टी, दस्त, पेचिस, पेट दर्द, टांसिल, खसरा, चिकनपाक्स, गलसुआ में यह अधिक प्रभावी है।

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पुराने रोगों में प्रभावी

होम्योपैथ चिकित्सक डा.मनोज गुप्ता के अनुसार पुरानी जटिल बीमारी, गठिया, साइटिका, अस्थमा, पेट दर्द आदि में यह दवा कारगर है। मानसिक रोगों जैसे अवसाद आदि के मरीजों को ठीक किया जाता है। इस पैथी में बीमारी का कारण पता लगाकर इलाज किया जाता है।

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