गोंडा: जिला अस्पताल में खून का कारोबार थम नहीं हो रहा है। शनिवार को हड्डी वार्ड में भर्ती एक मरीज को चिकित्सक ने खून चढ़ाने की सलाह दी। इस पर परेशान तीमारदार से शव वाहन के चालक ने सात हजार रुपये वसूल लिए। मामले की जानकारी प्रमुख अधीक्षक को हुई तो वह एक्शन में आ गए। संबंधित कर्मी व तीमारदार को आमने-सामने करके उन्होंने वसूले गए सात हजार रुपये वापस कराए। साथ ही संबंधित कर्मी को मरीज को खून की व्यवस्था कराने को कहा है।

जिला अस्पताल के हड्डी वार्ड में परसपुर के फूलचंद को भर्ती कराया गया है। उसका पैर टूट गया है। सिर में भी चोट है। आंख से दिखने में परेशानी है, इस पर चिकित्सकों ने उसकी हालत में सुधार न होने पर उसे खून चढ़ाने की सलाह दी। तीमारदार शांती का कहना है कि खून के लिए उसने काफी प्रयास किया लेकिन, कोई डोनर नहीं मिला। ऐसे में अस्पताल का ही एक कर्मचारी उसे मिला। जब उसने अपनी समस्या बताई तो संबंधित कर्मचारी ने सात हजार रुपये में खून उपलब्ध कराने की बात कही। उसने पैसे दे दिए। खून के इस कारोबार के बारे में जब प्रमुख अधीक्षक को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने निगरानी के लिए कर्मियों को लगाया। इसकी रिकार्डिंग कराई गई। तीमारदार व संबंधित कर्मी को आमने सामने किया गया। इसके बाद संबंधित का पैसा वापस कराया गया। प्रमुख अधीक्षक ने बताया कि चंद्रप्रकाश सिंह शव वाहन का चालक है। उसे चेतावनी दी गई है। अगर दोबारा ऐसी शिकायत मिलती है तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

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पहले भी आ चुका है मामला

-ब्लड बैंक में इससे पहले भी खून के नाम पर खेल पकड़ा जा चुका है। तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन के आदेश पर की गई छापेमारी में 12 यूनिट खून कम मिला था। इस मामले में उस वक्त मुकदमा किया गया था। बाद में मामले को दबा दिया गया।

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