गोंडा: बुधवार की भोर में तीन कांवड़ियों की मौत के बाद हर किसी की आंखें नम थीं। क्या हुआ. कैसे हुआ, यह सवाल हर किसी की जुबां पर था। इसके बाद बस आंखों से निकल रहे आंसुओं के बीच हर किसी के चेहरे पर अपनों के जाने का गम दिख रहा था।

थाना क्षेत्र के बाबागंज बाजार निवासी हिमांशु व शेखर शुक्ला तथा इमलिहवा रेतवागाड़ा निवासी विकास भगवान भोलेनाथ का गुणगान करते हुए बुधवार की सुबह साथियों के साथ निकले थे। भक्ति भाव से सराबोर वह जल भरने के लिए गुमड़ी घाट पुल पर पहुंचे। वहां पर जल लेने से पहले पूजन के लिए वह सभी नदी में स्नान करने के लिए उतरे लेकिन, जब तक कोई कुछ समझ पाता तब तक एक-एक करके वह डूबने लगे। इससे वहां पर अफरा-तफरी मच गयी। हर ओर बचाओ-बचाओ की गूंज सुनाई देने लगी। जब तक कोई कुछ करता तब तक तीन कांवड़िया डूब चुके थे। एक को किसी तरह से बचाया गया। डूबने से बचे शिवा की मानें तो हम लोग तीन साल से नदी में जलभरकर गोफानाथ मंदिर पर चढ़ाने के लिए जाते हैं। लग रहा था कि नदी में कोई खींच रहा है। इसके बाद वह रोने लगता है। हालांकि इसमें प्रशासन की भूमिका सवालों में है। गुमड़ी घाट पर कांवड़ियों के आने की सूचना के बाद भी यहां पर धानेपुर पुलिस या प्रशासन की तरफ से कोई प्रबंध नहीं था। एसओ अतुल चतुर्वेदी का कहना है कि घाट पर जो स्नान का क्षेत्र है, वह बलरामपुर जिले में आता है।

दिन भर लगी रही भीड़

- तीन कांवड़ियों की मौत के बाद बुधवार को पूरे दिन गुमड़ी घाट पर लोगों की भीड़ लगी रही। हर कोई घटना के बारे में जानकारी करना चाह रहा था। दोपहर में विधायक विनय कुमार द्विवेदी, पूर्व विधायक नंदिता शुक्ला, ¨हदू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष शारदाकांत पांडेय ने भी पहुंचकर जानकारी ली।

छाया रहा मातम

- तीन कांवड़ियों की मौत के बाद रेतवागाड़ा व बाबागंज बाजार में मातम पसरा रहा। बाबागंज के विजय मोदनवाल के दो बेटों में से हिमांशु सबसे बड़ा था। छोटा बेटा अभी चार साल का है। इनके यहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। अन्य मृतकों के परिजन रो-रोकर बेसुध हो रहे थे। सभी की आंखें नम थीं।

Posted By: Jagran