गोंडा : बलरामपुर जिला चिकित्सालय में तैनात सर्जन डॉ. आरपी मिश्र की कोरोना से मौत होने के बाद उनके पैतृक गांव रामापुर में मातम का माहौल है। चिकित्सकों ने भी शोक जताया है।

बताया जाता है कि डॉ. आरपी मिश्र कौड़िया थाने के रामापुर कस्बे के रहने वाले थे। उनके पिता सेवानिवृत्त शिक्षक रामलोचन मिश्र बीते सात जुलाई को गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद वह गांव चले आए। तब से वह वहीं रह रहे थे। 23 जुलाई को उनकी तबीयत खराब हो गई। जिसके बाद उन्होंने जिला अस्पताल में जांच कराया। कोरोना का सैंपल भी जांच के लिए भेजा गया। जिसमें वह पॉजिटिव आए। उन्हें लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनका अंतिम संस्कार भी लखनऊ में ही कराया गया। वह अपने पीछे पत्नी डॉ. मीनाक्षी मिश्रा, बेटा रचित व बेटी रचिता को छोड़ गए हैं। एक माह के भीतर ही बाप-बेटे की मौत ने ग्रामीणों व सगे-संबंधियों को झकझोर कर रख दिया है। गांव में मातम का माहौल है। डॉ. आरपी मिश्र के मिलनसार व्यक्तित्व और अपनेपन को याद कर लोग द्रवित हो जा रहे हैं। शहर के सिविल लाइंस में उनकी पत्नी की क्लीनिक थी। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने दो मिनट का मौन रखकर शोक जताया है। नहीं हो सका राजफाश

सेवानिवृत्त शिक्षक रामलोचन मिश्र की हत्या के मामले में उनके पुत्र डॉ. आरपी मिश्र ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस अभी तक मामले का खुलासा नहीं कर पाई है।

Posted By: Jagran

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