गोंडा : राममंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली गोनार्द की धरती भी उस शुभ घड़ी का इंतजार कर रही है, जब करोड़ों के आराध्य प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर आकार लेगा। सैकड़ों साल के इंतजार व लंबे संघर्षों के बाद वह अद्भुत संयोग आ गया। पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे। इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत करने के लिए यहां के लोगों को बेसब्री से इंतजार है। राम काज निर्विघ्न हो, इसके लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। दीपोत्सव की भी तैयारियां चल रही हैं।

धर्मनगरी अयोध्या व गोंडा के बीच महज सरयू नदी का फासला है। सबसे करीबी पड़ोसी इस जिले को गोनार्द की भूमि कहा जाता है। किवदंती है कि अयोध्या के महाराजा की गायें यहां चरने के लिए आती थीं। अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा पथ में जिले के भी कई पड़ाव स्थल शामिल हैं। ऐसे में अयोध्या की खुशी में गोंडा बराबर का सहभागी बनने जा रहा है। इसीलिए गोनार्द की धरती भी कहा जाता है।

श्रीराम मंदिर आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह कहते हैं कि करोड़ों लोगों की आस्था अब मूर्तरूप लेने जा रही है। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी समूचा देश बनेगा। पांच अगस्त को हम भी पूरे गर्व के साथ ही दीपावली मनाएंगे। इसके लिए तैयारी की जा रही हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष सूर्य नारायण तिवारी कहते हैं कि जिले के लगभग पांच लाख कार्यकर्ता अपने घरों में दीये जलाकर खुशियां मनाएंगे। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं।

हिदू युवा वाहिनी जिलाध्यक्ष शारदाकांत पांडेय मंदिर निर्माण की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अयोध्या स्थित दशरथ गद्दी मंदिर परिसर में नवग्रह वाटिका की स्थापना कर चुके हैं। 1054 ग्राम पंचायतों में भव्यता के साथ दीपोत्सव मनाने की तैयारी है।

कटरा स्थित कुटी धाम मंदिर के महंत स्वामी चिन्मयानंद कहते हैं कि प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की राह में कोई बाधा न आए, इसके लिए चार अगस्त को कुटी धाम में अखंड कीर्तन सुबह नौ बजे शुरू होगा। अगले दिन सुबह 11 बजे हवन के साथ इसका समापन होगा। महंत ने कहा कि वह शुभ दिन आ गया जिसका इंतजार करोड़ों जनमानस कर रहा था। कई सौ साल बाद हिदू समाज का स्वप्न पूरा होने जा रहा है। इस क्षण को गौरव और भव्यता के साथ मनाएंगे।

अयोध्या से लगी बस्ती जिले की हर्रैया विधानसभा सीट से विधायक अजय सिंह ने बताया कि पांच अगस्त को पांच बजे प्रभु श्रीराम के मूल स्थान मखौड़ा, जहां श्रृंगी ऋषि ने महाराजा दशरथ से पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था, वहां दीपोत्सव का आयोजन किया गया है।

Posted By: Jagran

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