गोंडा : कोरोना को देखते हुए जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अब सिर्फ इमरजेंसी ओपीडी संचालित की जाएगी। सामान्य ओपीडी बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है। इसकी पुष्टि नोडल अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने की है।

वैसे शनिवार को जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे तक सामान्य ओपीडी संचालित की गई। इसके बाद सन्नाटा पसर गया। कई चिकित्सकों ने मरीजों की परेशानी को देखते हुए ओपीडी बंद होने के बाद भी मरीज देखने में लगे रहे।

रेफर होने के नाम से मरीज हो रहे परेशान :

सड़क हादसे में घायल आनंद को चिकित्सकों ने लखनऊ रेफर करने को कहा तो परिवारजन वहां पर ले जाने को तैयार नहीं हुए। बाद में टेंपो बुलाकर मरीज को एक निजी अस्पताल में ले गए।

बाहरी व्यक्तियों का दर्ज होगा विवरण :

सीएमओ कार्यालय में आने वाले बाहरी व्यक्तियों का विवरण दर्ज होने के बाद ही उन्हें प्रवेश मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त कई अन्य प्रबंध किए गए हैं।

दवा की दुकानों की होगी जांच :

एसीएमओ डॉ. एपी सिंह ने नगर में मेडिकल स्टोरों की जांच की। उन्होंने कोविड मरीजों के इलाज में आने वाली दवाओं के बारे में जानकारी हासिल की।

760 का हुआ टीकाकरण :

शनिवार को 17 केंद्रों पर हुए टीकाकरण में 760 को कोरोनारोधी टीका लगाया गया। साथ ही उनका पंजीकरण किया गया।

वाहन के इंतजार में 12 घंटे तक पड़ा रहा कोरोना संक्रमित का शव :

कोरोना संक्रमण के बीच एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। शहर के एक निजी अस्पताल में एक कोरोना संक्रमित की मौत के करीब 12 घंटे बाद शव वाहन मिल सका। नगर के एक मुहल्ले के निवासी व्यक्ति को कोरोना से संक्रमित होने पर उसे इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां पर इलाज के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। इससे उनकी मौत हो गई। मौत के बाद परिवारजन शव वाहन को लेकर परेशान थे। करीब 12 घंटे बाद सीएमओ डॉ. अजय सिंह गौतम हस्तक्षेप पर शव वाहन मिल सका। परसपुर में कोरोना संक्रमित के फांसी लगाने के मामले में भी शव वाहन विलंब से पहुंचने का मामला आया है। इसके अतिरिक्त मालवीय नगर में एक कोरोना संक्रमित ने स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाली दवाओं की किट को लेकर सवाल उठाए हैं। कहा है कि उसे एक ही तरह की दवाएं मिली है। इसकी शिकायत की गई है।

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