बलरामपुर : प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में मरीजों को बाहर की दवा लिखना चिकित्सक के लिए आमदनी का जरिया बन गया है। डॉक्टर स्टॉक होने के बाद भी उन्हें बाहर की दवा लिखने से बाज नहीं आ रहे हैं, जिससे मरीजों व तीमारदारों की जेब कट रही हैं। हरैया क्षेत्र के पूरनपुर निवासी धर्मराज मिश्र चार महीने से अस्पताल में अपने सात वर्षीय भतीजे शिवा का इलाज करा रहा है। उसने बताया कि अस्पताल से दो दवा ही मिली है। सात दवा डॉक्टर ने बाहर से मंगवाई है। जो 692 रुपये में खरीदकर लाया है। संदीप ने बताया कि उसकी पत्नी को डॉक्टर ने 970 रुपये की दवा लिख दी। अस्पताल से दो दवा ही मुफ्त मिली है। जेनरिक दवाओं से भी परहेज

- अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र के एक कर्मचारी ने बताया कि डॉक्टर मरीजों को जेनरिक दवा लिखने से भी परहेज करते हैं। चिकित्सकों ने मेडिकल स्टोर पर कुछ विशेष दवा रखवा दी है। मरीजों को वही दवा लिखी जाती हैं। इसके लिए उन्हें अच्छा कमीशन मिलता है। स्टॉक फुल, जारी होगी नोटिस

- सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्त का कहना है कि अस्पताल में जरुरी दवाएं उपलब्ध हैं। बाहर की दवा लिखने पर एक चिकित्सक को फटकार लगाई गई है। बैठक में चिकित्सकों को ऐसा न करने का निर्देश दिया है। बाहर की दवा लिखने वालों को नोटिस दी जाएगी।

Posted By: Jagran