बारिश ने उजाड़ी सब्जी की फसल, महंगाई ने बदली थाली; मंडी में आवक घटते ही दामों में उछाल
गोंडा में लगातार बारिश और आंधी से सब्जियों की फसलें चौपट हो गई हैं, जिससे बाजार में आवक घटने के कारण हरी सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
लगातार बारिश और आंधी से सब्जियों की फसलें हुईं चौपट।
बाजार में आवक घटने से हरी सब्जियों के दाम बढ़े।
परवल 120 रुपये, लोबिया 100-120 रुपये प्रति किलो बिकी।
संवाद सूत्र, गोंडा। पांच दिन तक हुई लगातार बारिश और आंधी से सब्जियों की फसल चौपट हो गई है। खेतों में नुकसान के बाद बाजार में आवक घटते ही हरी सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। परवल 120 रुपये किलो के पार पहुंच गया है। लोबिया 100 से 120 रुपये, तरोई 60, भिंडी 60 रुपये किलो, प्याज 60 रुपये किलो और लौकी 50 रुपये किलो बिक रही है। अचानक बढ़े भाव ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
थाली में पहले जहां कई तरह की सब्जियां नजर आती थीं, अब महंगाई के कारण मात्रा और विकल्प दोनों घटने लगे हैं। बारिश से सबसे अधिक असर सब्जी उत्पादकों पर पड़ा है। इसका सीधा असर बाजार की आवक पर पड़ा और कीमतें तेजी से बढ़ गईं। बारिश ने खेत में किसान की मेहनत बहा दी और बाजार में महंगाई ने आम आदमी की थाली का स्वाद छीन लिया।
फसलें हो गईं खराब
बेहड़ा चौबे गांव के रहने वाले सुरेश वर्मा का कहना कि नौ बीघा खेत में हरी सब्जी की खेती की थी। बारिश से पूरी फसल चौपट हो गई। यह पीड़ा केवल विनोद की ही नहीं बल्कि हजारों सब्जी किसानों की है , जिनकी फसलें खराब हो गईं हैं।
सब्जियों के बढ़े दाम ने घरों का हिसाब-किताब बिगाड़ दिया है। पहले एक साथ कई किलो सब्जियां खरीदने वाले परिवार अब जरूरत भर की खरीदारी कर रहे हैं। महंगे परवल और लोबिया की जगह सस्ती सब्जियों का सहारा लेना पड़ रहा है। बेहड़ा चौबे गांव के किसान सुरेश वर्मा की नौ बीघा, इसी गांव के कन्हैया लाल की तीन बीघा और दुल्लापुर के रामचरन की चार बीघा में हरी सब्जियों की खेती की थी।
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बारिश और आंधी में पूरी फसल चौपट हो गई। तैयार फसल नष्ट होने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बारिश ने खेत में किसान की मेहनत डुबो दी और बाजार में महंगाई ने आम आदमी की थाली छोटी कर दी। सब्जियों की आवक सामान्य होने तक लोगों को महंगे भाव की मार झेलनी पड़ सकती है।
