मगरमच्छ के डर ने छीना दिन का सुकून और रात की नींद, गहरे पानी में होकर आने-जाने से बढ़ा हमले का खतरा
गोंडा में सरयू-घाघरा नदियों का जलस्तर बढ़ने से 14 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे 30,000 लोग ...और पढ़ें
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नवाबगंज के ब्योंदा माझा में प्राइवेट नाव से आवागमन करते बाढ़ पीड़ित। जागरण
जागरण टीम, गोंडा। सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ का पानी दत्तनगर के बाणी माझा के कई घरों में भर गया है। 14 गांवों के रास्तों पर जलभराव से उनका मुख्य मार्ग संपर्क टूट गया है। स्कूलों में जलभराव व जमाव से छात्रों की पढ़ाई बाधित हो गई है।
परास पट्टी मझवार में भैंस चराने गए किसान पर मगरमच्छ के हमले के बाद ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। 12 ग्राम पंचायतों के 25 मजरों के 30 हजार बाढ़ पीड़ितों को न तो दिन में सुकून है और न ही रात को चैन की नींद से पा रहे हैं। इन्हें हर पल डर लगा रहता है कि कहीं मगरमच्छ न आ जाए।
एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर व अयोध्या में सरयू नदी 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। घाघरा नदी में तीन लाख 47 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है।
कहीं नाव तो कहीं राशन, भूसा के लिए लोग परेशान
नवाबगंज: माझा इलाके में लगातार बढ़ रहे सरयू के जलस्तर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रिंग रोड के पूर्वी दिशा में पड़ने वाले गावों में पानी की अधिकता के चलते लोग मुसीबत झेल रहे हैं।
कहीं नाव तो कहीं राशन, भूसा के लिए लोग परेशान हैं। ब्यौंदा माझा में बाजार से गांव जाने वाला मुख्य मार्ग पानी में डूब गया है। पुलिया के पास सड़क भी कट गयी है।
प्रशासक केशवराम यादव ने बताया कि सभी 14 मजरों में पानी है। निर्माणाधीन रिंग रोड में पानी निकलने को बनी पुलिया छोटी है, जिससे बड़ा होना चाहिए।
दो दिन से गांव का प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालय चारों तरफ पानी भरने के कारण बंद हैं। एक स्टीमर मिली है। 30 हजार आबादी पर 14 सरकारी नाव आई है,जो काफी कम है। इसलिए लोग गहरे पानी से होकर आने जाने को विवश हैं।
तरबगंज: बीडीओ सुष्मिता यादव ने ब्यौदा मांझा प्राथमिक विद्यालय में रसोई व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने नाव पर बैठकर बाढ़ पीड़िताें की समस्याएं देखीं। उधर दोपहर बाद शहर में हल्की बारिश हुई। इससे सड़के कीचड़मय हो गई। कई कालोनियों में कच्चे रास्तों के चलते लोगों का घर से निकल पाना मुश्किल हो गया।
